जीजीएस मेडिकल कॉलेज फरीदकोट ने कैंसर के इलाज में इतिहास रचा
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-पंजाब के सरकारी संस्थानों में पहली बार ‘CRS + HYPAC’ जैसी मुश्किल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई…
फरीदकोट (अलेक्जेंडर डिसूजा): बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के तहत चल रहे गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, फरीदकोट ने कैंसर के इलाज में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) राजीव सूद की काबिल लीडरशिप में अस्पताल की एक्सपर्ट टीम ने पंजाब और पड़ोसी राज्यों के सरकारी संस्थानों में पहली बार साइटोरिडक्टिव सर्जरी (CRS) और हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी (HIPEC) जैसी बहुत मुश्किल सर्जरी सफलतापूर्वक की है।
एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम ने दिखाया कमाल:
यह ऐतिहासिक सर्जरी सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रोहित जिंदल की लीडरशिप में डॉ. परमिंदर सिंह संधू के गाइडेंस में की गई। इस टीम में डॉ. विमल भट्ट और डॉ. परगट सिंह ने अहम रोल निभाया। एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट की हेड डॉ. सर्वजीत कौर की देखरेख में, डॉ. गुरकर्ण कौर और डॉ. सीमा (आईसीयू टीम) ने इस लंबे और मुश्किल ऑपरेशन के दौरान मरीज़ को स्टेबल रखने में बहुत मदद की।
CRS + HIPAC तकनीक क्या है-?
यह तकनीक उन मरीज़ों के लिए जान बचाने वाली साबित होती है जिनका कैंसर पेरिटोनियम तक फैल गया है।
प्रोसीजर: सबसे पहले, सर्जरी के ज़रिए दिखने वाले कैंसर टिशू को निकाला जाता है।
कीमोथेरेपी: इसके बाद, गर्म कीमोथेरेपी दवा को सीधे पेट में कंट्रोल्ड टेम्परेचर पर इंजेक्ट किया जाता है, ताकि बचे हुए माइक्रोस्कोपिक कैंसर सेल्स को खत्म किया जा सके।
फायदे: यह तरीका पेट, ओवरी, कोलन और गॉलब्लैडर कैंसर में बहुत असरदार है।
अब महंगे अस्पतालों पर निर्भरता खत्म होगी:
वाइस चांसलर डॉ. राजीव सूद ने इस सफलता को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के हेल्थ मिशन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि अब मालवा इलाके के मरीज़ों को इतने महंगे इलाज के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों या महंगे प्राइवेट अस्पतालों में जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नीतू कुक्कड़ ने भी इस ऐतिहासिक कदम के लिए पूरी टीम को बधाई दी।
न्यूज़:19-1.
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