लोकेशन ढीमरखेड़ा कटनी
दतला नदी पर रेत माफियाओं का कब्जा, 6 साल से शिकायतें, फिर भी कार्रवाई नहीं
दिन में नदी से उत्खनन, रात में ट्रैक्टरों से सप्लाई, किसानों की जमीन कट रही, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
ढीमरखेड़ा | ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र के सुनारखेड़ा और दतला पुल के पास दतला नदी में अवैध रेत खनन का खेल लगातार जारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी से खुलेआम रेत निकाली जा रही है और रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में सप्लाई की जा रही है। कई वर्षों से शिकायतों के बावजूद खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता अब सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायतों के अनुसार राजस्थान निवासी देवेंद्र राठौर पिछले लगभग छह वर्षों से दतला नदी पुल के समीप रहकर अवैध रेत कारोबार संचालित कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में कई बार नामजद शिकायतें खनन विभाग, राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी गईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
खुद का ट्रैक्टर नहीं, फिर भी रोजाना लाखों के कारोबार की चर्चा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिस व्यक्ति पर अवैध रेत कारोबार संचालित करने के आरोप लग रहे हैं, उसके पास स्वयं का एक भी ट्रैक्टर-ट्रॉली नहीं है। बताया जाता है कि क्षेत्रीय ट्रैक्टर मालिकों को प्रति चक्कर लगभग 500 रुपए देकर रेत परिवहन कराया जाता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि प्रतिदिन चार से पांच ट्रैक्टर-ट्रॉलियां किराये पर चलाकर नदी से निकाली गई रेत विभिन्न स्थानों तक पहुंचाई जाती है, जिससे मोटी रकम की कमाई की जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है और रेत परिवहन का काम सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। दिन में नदी किनारे रेत के बड़े-बड़े ढेर जमा किए जाते हैं और रात होते ही उन्हें ट्रैक्टरों के माध्यम से खपाया जाता है।
मुख्य सड़क किनारे चल रहा गोरखधंधा, फिर भी जिम्मेदार बेखबर
सबसे बड़ी बात यह है कि दतला पुल क्षेत्र जबलपुर, कुंडम और कटनी को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग पर स्थित है। यहां दिनभर सैकड़ों वाहन और यात्री बसों का आवागमन रहता है। इसके बावजूद अवैध खनन और परिवहन का यह खेल वर्षों से जारी रहना प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अवैध खनन के कारण दतला नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। नदी किनारे बसे किसानों का कहना है कि लगातार रेत निकाले जाने से भूमि कटाव बढ़ गया है और कई खेतों का हिस्सा नदी में समा चुका है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध खनन पर रोक नहीं लगी तो आने वाले समय में नदी का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध खनन और परिवहन में संलिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का सवाल
जब छह वर्षों से लगातार शिकायतें हो रही हैं, अवैध खनन और परिवहन खुलेआम जारी है, तो आखिर जिम्मेदार विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे,यह सवाल अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।





