बाणसागर नहर में मौत से जंग लड़ता मिला सांभर, वन विभाग और ग्रामीणों ने दिखाया साहस, घंटों की मशक्कत के बाद बचाई जान
रीवा, 04 जून 2026।

बीट पूर्वी मड़वा के वन क्षेत्र में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब टीकर से सिलपरा जाने वाली बाणसागर नहर में एक दुर्लभ वन्यप्राणी सांभर (नर) के गहरे पानी में गिरकर बहने की सूचना वन विभाग को प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही सर्किल टीकर की वन विभागीय टीम तत्काल मौके पर पहुंची और वन्यजीव को सुरक्षित बचाने के लिए अभियान शुरू किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सांभर काफी देर से नहर के तेज बहाव और गहरे पानी में जीवन बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था। थकान और भय के कारण उसकी स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही थी। नहर के दोनों किनारों पर ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हो गई और सभी की निगाहें वन विभाग की रेस्क्यू टीम पर टिकी थीं।
वन विभाग के कर्मचारियों, सुरक्षा श्रमिकों एवं स्थानीय ग्रामीणों ने अद्भुत साहस और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए रस्सियों और जाल की सहायता से रेस्क्यू अभियान चलाया। कई लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर नहर के गहरे पानी में उतरना पड़ा। सांभर लगातार बहते हुए टीकर स्टैंड के समीप नहर की पुलिया तक पहुंच गया, जहां टीम ने रणनीति बनाकर उसे घेर लिया और काफी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
रेस्क्यू के दौरान मौजूद लोगों ने बताया कि सांभर पूरी तरह थक चुका था, लेकिन जैसे ही उसे पानी से बाहर निकाला गया, उसकी जान बचने की उम्मीद लौट आई। वन विभाग की टीम ने तत्काल उसे शासकीय वाहन से पशु चिकित्सालय गोविंदगढ़ पहुंचाया, जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण एवं आवश्यक उपचार कराया गया।
चिकित्सकीय परीक्षण में सांभर की स्थिति सामान्य पाए जाने के बाद उसे पुनः उसके प्राकृतिक आवास, बीट पूर्वी मड़वा के वन क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया गया। जंगल में पहुंचते ही सांभर को स्वच्छंद विचरण करते देख वन विभाग के कर्मचारियों एवं ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
वन्यप्राणी सांभर के सफल रेस्क्यू अभियान में अनिल कुशवाहा (परिक्षेत्र सहायक, टीकर), गोपाल शरण त्रिपाठी (बीटगार्ड, पूर्वी मड़वा), आयुष तिवारी (वनरक्षक, वन परिक्षेत्र रीवा), अशोक तिवारी (वाहन चालक) तथा सर्किल टीकर के सुरक्षा श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
वन विभाग की अपील
वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी भी वन्यजीव के घायल होने, भटककर आबादी क्षेत्र में आने अथवा किसी संकट में फंसने की सूचना मिले तो उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचित करें। वन्यजीव हमारे प्राकृतिक पर्यावरण और जैव विविधता की अमूल्य धरोहर हैं, जिनका संरक्षण हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
यह सफल रेस्क्यू अभियान न केवल वन विभाग और ग्रामीणों के बेहतर समन्वय का उदाहरण है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व एवं संवेदनशीलता ही प्रकृति संरक्षण का सबसे प्रभावी मार्ग है।





