संवाददाता: दीनानाथ गुप्ता
मध्य प्रदेश के ग्राम टिकरी 37 में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन) को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यहां संचालित समूह द्वारा गरीबों को मिलने वाले खाद्यान्न में लगातार कटौती की जा रही है, जिससे पात्र हितग्राहियों को उनका पूरा हक नहीं मिल पा रहा।
ग्रामीणों के अनुसार, जहां प्रति यूनिट 20 किलो अनाज मिलना चाहिए, वहां केवल 15 से 16 किलो ही वितरित किया जा रहा है। इसी तरह 35 किलो मिलने वाले राशन में भी लगभग 5 किलो तक की कमी की शिकायत की गई है। इतना ही नहीं, पीले राशन कार्डधारकों को हर महीने मिलने वाली शक्कर भी नियमित रूप से नहीं दी जा रही। ग्रामीणों का आरोप है कि शक्कर दो से चार महीने में एक बार ही वितरित की जाती है।
स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले में समूह संचालक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इसे खुला भ्रष्टाचार बताया है। उनका कहना है कि यह घोटाला लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने खाद्य विभाग, फूड इंस्पेक्टर और प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गरीबों को उनका पूरा अधिकार मिल सके।
ग्रामीणों की मुख्य मांगें:
राशन वितरण में हो रही कटौती की जांच
नियमित रूप से शक्कर का वितरण सुनिश्चित किया जाए
दोषी अधिकारियों और समूह संचालक पर कड़ी कार्रवाई
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।





