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सेवा सहकारी समिति की तानाशाही से किसान परेशान, आत्महत्या और चक्का जाम की चेतावनी

admin
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सेवा सहकारी समिति की तानाशाही से किसान परेशान, आत्महत्या और चक्का जाम की चेतावनी

 

5 दिवस में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

 

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उमरिया | मानपुर

 

उमरिया जिले के मानपुर तहसील अंतर्गत आने वाली सेवा सहकारी समिति कोटरी एक बार फिर विवादों में घिर गई है। किसानों ने समिति प्रबंधक, खरीदी प्रभारी और कर्मचारियों पर तानाशाही, भ्रष्टाचार और अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि यदि पांच दिनों के भीतर दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे चक्का जाम और धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

 

प्रति बोरा 51.500 किलो गेहूं भर्ती का आरोप

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किसानों के अनुसार समिति में प्रति बोरा 51.500 किलो गेहूं की भर्ती की जा रही थी। खेरवा और टिकुरी गांव के किसानों ने जब इसका विरोध किया तो खरीदी प्रभारी रणविजय द्विवेदी द्वारा कथित रूप से गाली-गलौज की गई और मारपीट करने की कोशिश की गई। इससे किसान मानसिक रूप से परेशान हो गए।

 

पीड़ित किसानों ने 08 मई 2026 को अमरपुर चौकी में लिखित शिकायत देकर न्याय की मांग की थी, लेकिन आरोप है कि अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद किसान रामसाजीवन तिवारी ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर जनसुनवाई में अपनी पीड़ा सुनाई।

 

“कार्रवाई नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन”

 

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे सामूहिक प्रदर्शन, चक्का जाम और उग्र आंदोलन करेंगे। किसानों का कहना है कि लगातार हो रहे मानसिक उत्पीड़न के कारण वे आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।

 

समिति पर पहले भी लग चुके हैं भ्रष्टाचार के आरोप

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि सेवा सहकारी समिति कोटरी पर पहले भी कई बार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं। जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। किसानों ने यह भी सवाल उठाया कि पूर्व में खरीदी कार्य से हटाए जाने के बाद भी रणविजय द्विवेदी को दोबारा खरीदी प्रभारी कैसे बना दिया गया।

 

प्रशासनिक कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

 

घटना के बाद अपर कलेक्टर, एसडीएम मानपुर, तहसीलदार और पटवारी मौके पर पहुंचे थे और कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन किसानों का आरोप है कि अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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