समुद्र की लहरों पर भी था “उमरिया” का नाम
ब्रिटिश इंडिया स्टीम नेविगेशन कंपनी का एस.एस. उमरिया

मध्यप्रदेश का उमरिया केवल कोयला खदानों और रेलवे के लिए ही प्रसिद्ध नहीं रहा। बीसवीं सदी के आरंभ में ब्रिटिश इंडिया स्टीम नेविगेशन कंपनी के बेड़े में “उमरिया” नाम का एक भाप-पोत भी था, जिसका उल्लेख ब्रिटेन के समुद्री और सैन्य अभिलेखों में मिलता है।
एस.एस. उमरिया का निर्माण 1914 में स्कॉटलैंड की अलेक्ज़ेंडर स्टीफन एंड सन्स लिमिटेड ने किया था। इसका आधिकारिक क्रमांक 136313, निर्माण-यार्ड क्रमांक 460 और सकल टन भार लगभग 5,317 टन था। जहाज लगभग 410 फुट लंबा और 52 फुट चौड़ा था।
प्रथम विश्वयुद्ध शुरू होने के बाद इसे ब्रिटिश भारतीय सेना के मेसोपोटामिया अभियान में लगाया गया। ब्रिटिश लाइब्रेरी के इंडिया ऑफिस अभिलेखों में भारतीय अभियान सेना “डी” से जुड़े जहाजों में उमरिया का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज है।
1915 के इसके चालक-दल संबंधी मूल अभिलेख आज भी रॉयल म्यूज़ियम्स ग्रीनविच में सुरक्षित हैं। इन अभिलेखों से जहाज का ऐतिहासिक अस्तित्व पूरी तरह प्रमाणित होता है।
26 मई 1917 को प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान भूमध्य सागर में जर्मन पनडुब्बी यू-65 ने एस.एस. उमरिया को डुबो दिया। इस हमले में चालक दल के पाँच सदस्यों की मृत्यु हुई। इस प्रकार लगभग तीन वर्ष की सेवा के बाद पहला उमरिया जहाज युद्ध की भेंट चढ़ गया।
ब्रिटिश इंडिया स्टीम नेविगेशन कंपनी ने बाद में भी “उमरिया” नाम को जीवित रखा। 1941 और 1946 में दो अन्य जहाजों को भी यही नाम दिया गया।
उमरिया तत्कालीन रीवा राज्य का महत्वपूर्ण कोयला नगर था और ब्रिटिश इंडिया स्टीम नेविगेशन कंपनी अपने अनेक जहाजों का नाम भारतीय नगरों और स्थानों पर रखती थी
इस प्रकार एस.एस. उमरिया केवल एक जहाज नहीं, बल्कि उमरिया नाम की वैश्विक ऐतिहासिक उपस्थिति का एक दुर्लभ प्रमाण है—जहाँ विंध्य की कोयला नगरी का नाम समुद्र और प्रथम विश्वयुद्ध के इतिहास तक पहुँचा।





