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भीषण गर्मी में ‘जल जीवन मिशन’ की खुली पोल, प्यास से जूझ रहे ग्रामीण

admin
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बूंद-बूंद को तरसते खरखरा गांव, कागज़ों में बहता विकास!

भीषण गर्मी में ‘जल जीवन मिशन’ की खुली पोल, प्यास से जूझ रहे ग्रामीण

 

रिपोर्टर – दुलीचंद मार्को 

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 निवास (मण्डला)

 

आसमान से बरसती आग और सूखते जलस्रोतों के बीच मण्डला जिले के आदिवासी अंचल निवास विकासखंड के ग्राम पंचायत सुखरी संग्रामपुर सहित पोषक ग्राम खरखरा और जलधरा इन दिनों गंभीर जल संकट की चपेट में हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि सिर्फ इंसान ही नहीं, पशु-पक्षी भी पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में महिलाएं और बच्चे कई किलोमीटर दूर स्थित कुएं और झिरिया से पानी ढो रहे हैं। तपती गर्मी में पानी की हर बूंद संघर्ष से मिल रही है, लेकिन जिम्मेदार तंत्र की सक्रियता ज़मीन पर दिखाई नहीं दे रही।

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गांव प्यासे, जिम्मेदार खामोश

निवास जनपद पंचायत क्षेत्र की 35 ग्राम पंचायतों में से कई गांव इन दिनों जल संकट की मार झेल रहे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार शिकायतें और आवेदन दिए जाने के बावजूद हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है।

 

ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी फाइलों में योजनाओं के आंकड़े और उपलब्धियां गिनाने में व्यस्त हैं, जबकि गांवों की जमीनी हकीकत सूखी पड़ी है।

 

‘जल जीवन मिशन’ पर उठे सवाल

सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन, नल-जल योजना और जल निगम परियोजनाओं को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। गांवों में कहीं पाइप लाइन अधूरी पड़ी है, कहीं सड़क किनारे पाइप फेंके हुए दिखाई देते हैं, तो कहीं सिर्फ नल लगाकर योजना पूरी दिखा दी गई।

 

करोड़ों रुपये खर्च होने के दावे किए गए, लेकिन ग्रामीणों तक पानी नहीं पहुंच सका। ऐसे में लोगों का आरोप है कि विकास योजनाएं ज़मीन पर नहीं, सिर्फ कागज़ों में बह रही हैं।

 

अब पानी नहीं, जवाबदेही की मांग

गांवों में बढ़ते आक्रोश के बीच अब सवाल सिर्फ पानी का नहीं, बल्कि जवाबदेही का भी है। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक उन्हें भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा?

 

क्या प्रशासन समय रहते जागेगा, या फिर सरकारी योजनाएं सिर्फ दावों और उद्घाटनों तक सीमित रह जाएंगी?

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