संवाददाता – सौरभ नागोत्रा
*खवासा में वन विभाग की क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित*
*जल संरक्षण एवं वन्यजीव प्रबंधन पर हुआ मंथन*

सिवनी: प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वनबल प्रमुख शुभरंजन सेन की अध्यक्षता में पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा खवासा में क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में प्रधान मुख्य वन संरक्षक पुरुषोत्तम धीमान, मनोज अग्रवाल, बी. एस. अन्नेगिरि तथा अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एल. कृष्णमूर्ति, कोमोलिका मोहता, एच. एस. मोहंता, मोहनलाल मीणा एवं अमित दुबे उपस्थित रहे।
कार्यशाला में क्षेत्र संचालक पेंच टाइगर रिजर्व जे. देवाप्रसाद, क्षेत्र संचालक कान्हा टाइगर रिजर्व रवीन्द्र मणि त्रिपाठी, मुख्य वन संरक्षक बालाघाट वनवृत्त गौरव चौधरी, मुख्य वन संरक्षक जबलपुर वनवृत्त एम.आर. बघेल, वन संरक्षक छिंदवाड़ा वनवृत्त कमल अरोरा, वन संरक्षक सिवनी वनवृत्त संध्या तथा क्षेत्रीय महाप्रबंधक ब्रजेन्द्र झा द्वारा अपने-अपने कार्यक्षेत्र में किए गए नवाचारों एवं कार्यों का प्रस्तुतीकरण दिया गया।
कार्यशाला में वर्ष 2025-26 के कार्यआयोजना एवं कैम्पा कार्यों की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, लंबित भू-प्रबंध प्रकरण, राज्य बांस मिशन की उपलब्धियां, पौध तैयारियां एवं वृक्षारोपण कार्यों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत जल संरक्षण कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण कर पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश वनबल प्रमुख द्वारा दिए गए।
संरक्षित क्षेत्रों के साथ-साथ अन्य वन क्षेत्रों में बढ़ती बाघों की उपस्थिति को देखते हुए वन्यप्राणी प्रबंधन संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए। तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य प्रारंभ होने से पूर्व संग्रहण एवं गोदामीकरण व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को सुदृढ़ कर स्थानीय ग्रामीणों एवं आदिवासी समुदाय की सहभागिता बढ़ाने, वृक्षारोपण एवं वन सुरक्षा कार्यों में जन-सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
कार्यशाला में आरा मशीन प्रकरण, बीट निरीक्षण, मानव-वन्यप्राणी द्वंद्व, लैंड बैंक निर्माण, रोपणी अधोसंरचना एवं आस्थामूलक कार्यों से जुड़े प्रस्तावों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
इसके अतिरिक्त विभिन्न वनमंडलों द्वारा वन एवं वन्यजीव प्रबंधन में किए जा रहे नवाचारों का प्रस्तुतीकरण भी किया गया। इसमें PAWS (पेंच एडवांस वार्निंग सिस्टम) के माध्यम से मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम, गुप्तचर एप द्वारा वन अपराधों की गोपनीय जानकारी संकलन, टिश्यू कल्चर से उन्नत पौध उत्पादन, वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से स्थानीय आदिवासी समुदाय की आर्थिक समृद्धि तथा अग्नि प्रबंधन उपायों जैसे विषय प्रमुख रहे। कार्यशाला में संबंधित वनवृत्तों के वनमंडल अधिकारी, उपसंचालक एवं संभागीय प्रबंधक उपस्थित रहे।





