99वें उर्स मेले की तैयारियां तेज
कलेक्टर ने अधिकारियों और उर्स कमेटी संग की समीक्षा बैठक
उमरिया/चंदिया | पत्रकार: फैज मोहम्मद
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के चंदिया नगर में हज़रत नौगजा शाहदाता रहमतुल्लाह अलैह के 99वें तीन दिवसीय उर्स मेले को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। 15, 16 और 17 मई को आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक उर्स मेले की तैयारियों को लेकर रविवार को कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय ने नगर परिषद चंदिया में अहम समीक्षा बैठक आयोजित की।
बैठक में एसडीएम अंबिकेश प्रताप सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीताराम सत्या, तहसीलदार, नगर परिषद सीएमओ किशन सिंह ठाकुर, पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री एचपी धुर्वे, यातायात प्रभारी, विद्युत विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं उर्स कमेटी की ओर से अध्यक्ष अब्दुल नसीब खान, सेक्रेटरी मोहम्मद असफाक खान सहित अन्य पदाधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक के दौरान उर्स मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और जायरीनों की सुविधाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। प्रशासन द्वारा यातायात व्यवस्था, पार्किंग, स्वच्छता, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, अग्निशमन व्यवस्था, विद्युत आपूर्ति, मार्गों के समतलीकरण तथा उर्स परिसर में बैरिकेडिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बारीकी से समीक्षा की गई और संबंधित विभागों को आवश्यक जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
कलेक्टर राखी सहाय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि उर्स मेले में आने वाले जायरीनों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रवेश और निकासी मार्गों को सुगम एवं व्यवस्थित बनाए रखने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी परिस्थिति में भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। साथ ही उर्स परिसर में पर्याप्त अग्निशामक यंत्रों की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा गया।
सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर प्रशासन द्वारा विशेष रणनीति तैयार की गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखने तथा मेले के दौरान लगातार व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि बीते 98 वर्षों से हज़रत नौगजा शाहदाता रहमतुल्लाह अलैह की चादरपोशी और उर्स का आयोजन निरंतर होता आ रहा है। इस वर्ष 99वां उर्स मनाया जा रहा है, जिसे लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। यह उर्स केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब और साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल माना जाता है, जहां हर धर्म और समुदाय के लोग बड़ी संख्या में पहुंचकर अकीदत पेश करते हैं।





