नफ़रत के दौर में मोहब्बत की जीत: अरइयाँवाला कलां में 100 साल पुरानी मस्जिद मुस्लिम समुदाय को सौंपी…



अरइयाँवाला कलां/ फरीदकोट (अलेक्जेंडर डिसूजा): आज के दौर में, जहाँ धर्म के नाम पर दीवारें खड़ी की जाती हैं, वहीं फरीदकोट के गांव अरइयाँवाला कलां की पंचायत और निवासियों ने इंसानियत और आपसी भाईचारे की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी गूँज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। गांव की साझा कोशिशों से, आज़ादी से पहले की करीब 100 साल पुरानी ऐतिहासिक मस्जिद को पूरी श्रद्धा के साथ मुस्लिम समुदाय के हवाले कर दिया गया।
79 साल बाद गूँजी अज़ान, अदा हुई नमाज़:
सन् 1947 के बंटवारे के बाद यह पहला मौका था, जब इस ऐतिहासिक मस्जिद की दीवारों ने फिर से ‘अल्लाह-हू-अकबर’ की सदा सुनी। मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी फरीदकोट के पदाधिकारियों की मौजूदगी में इमाम मोहम्मद ज़ाहिद और इमाम नजमुल हक ने बंटवारे के बाद पहली बार यहाँ नमाज़ अदा करवाई।
मस्जिद की चाबियां और देख-रेख की ज़िम्मेदारी मुस्लिम समुदाय को सौंपते समय माहौल काफी भावुक रहा।
पंचायत का बड़ा दिल: “इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म”:
इस नेक काम की कमान सरपंच कुलविंदर कुमार, सरपंच कुलजीत कौर विर्क और प्रेसिडेंट जगतार सिंह विर्क ने संभाली।
“हमारे लिए सभी धर्म-हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई-बराबर हैं। आज़ादी के बाद कुछ वक्त यहाँ गुरुद्वारा साहिब रहा, लेकिन पंचायत ने इस इमारत को मस्जिद के तौर पर ही सहेज कर रखा। आज इसे इसके असली वारिसों को सौंपकर हमें रूहानी सुकून मिला है”: कुलविंदर कुमार, सरपंच।
इनकी कोशिशों ने रंग लाया:
इस ऐतिहासिक पल को हकीकत में बदलने में गांव के डॉ. सुखदेव, रशपाल खान और गोल्डी बराड़ ने अहम भूमिका निभाई। डॉ. सुखदेव ने बताया कि वे लंबे समय से इस कोशिश में थे कि यह इबादतगाह अपने मूल स्वरूप में लौटे, जो आज अल्लाह की मर्जी से मुमकिन हुआ।
मुस्लिम समुदाय ने जताया आभार:
मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी के प्रेसिडेंट हाजी दिलावर हुसैन ने पंचायत का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि जल्द ही इमारत की मरम्मत और सफाई कर इसे इबादत के लिए पूरी तरह तैयार कर दिया जाएगा। उन्होंने गांव की तरक्की और खुशहाली के लिए विशेष दुआ भी की।
इस मौके पर उपस्थित मुख्य गणमान्य:
वाइस प्रेसिडेंट मोहम्मद हनीश कुरैशी, चीफ सेक्रेटरी मुन्ना खान मंसूरी, ट्रेजरर मोहम्मद राशिद समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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फोटो कैप्शन: मस्जिद की चाबियां सौंपते पंचायत सदस्य और नमाज़ अदा करते श्रद्धालु।






