📰 हेडलाइन:
माता-पिता की देखभाल के लिए अब 45 दिन का सवेतन अवकाश: ‘पवित्र बंधन’ विधेयक 2026 लागू
🗞️ सब-हेडलाइन:
सरकार का बड़ा फैसला—कर्मचारियों को पूरे सेवाकाल में मिलेगा विशेष Parent Care Leave, बुजुर्गों की देखभाल को मिलेगा बढ़ावा
—
नई दिल्ली, 14 अप्रैल 2026 | विशेष संवाददाता
देश में बढ़ती बुजुर्ग आबादी और बदलती पारिवारिक संरचना के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम सामाजिक कदम उठाते हुए “पवित्र बंधन (माता-पिता देखभाल अवकाश) विधेयक, 2026” लागू करने की घोषणा की है। इस फैसले के तहत अब कर्मचारियों को अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल के लिए विशेष सवेतन अवकाश दिया जाएगा।
विधेयक के अनुसार, किसी भी कर्मचारी को अपने पूरे सेवाकाल में अधिकतम 45 दिनों का ‘पेरेंट केयर लीव’ मिलेगा। यह अवकाश कर्मचारी एक बार में या जरूरत के अनुसार अलग-अलग समय पर ले सकता है।
सरकार ने इस कानून में माता-पिता की परिभाषा को व्यापक बनाते हुए जैविक, दत्तक और सौतेले माता-पिता के साथ-साथ सास-ससुर को भी शामिल किया है, बशर्ते उनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक हो।
यह प्रावधान केंद्र और राज्य सरकार के सभी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और उन निजी संस्थानों पर लागू होगा, जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। खास बात यह है कि यह अवकाश पूरी तरह सवेतन होगा और इसे कर्मचारी की अन्य छुट्टियों से नहीं काटा जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह विधेयक मौजूदा सामाजिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लाया गया है। तेजी से बदलती जीवनशैली और संयुक्त परिवार व्यवस्था के कमजोर होने के कारण बुजुर्गों की देखभाल एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
श्रम और सामाजिक नीति के जानकारों का मानना है कि इस कदम से कर्मचारियों का कार्य-जीवन संतुलन बेहतर होगा और परिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने में सहायता मिलेगी। हालांकि, निजी क्षेत्र में इसके क्रियान्वयन को लेकर कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं, जिनमें कार्य प्रबंधन और उत्पादकता बनाए रखना शामिल है।
📊 आगे क्या?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भविष्य में इस अवकाश की अवधि बढ़ाने और गंभीर बीमारियों के मामलों में अतिरिक्त सुविधाएं देने पर भी विचार किया जा सकता है।
—
🧾 निष्कर्ष:
“पवित्र बंधन” विधेयक को केवल एक अवकाश नीति नहीं, बल्कि भारतीय समाज में पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्गों के सम्मान को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।


