सालरगोंदी पंचायत में 15 लाख की पुलिया खेत में, सीसी सड़क उखड़ने लगी; फर्जी बिल भुगतान का आरोप, ग्रामीणों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच
राजेन्द्रग्राम (अनूपपुर)।
जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सालरगोंदी में विकास कार्यों में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में कई निर्माण कार्य ऐसे कराए गए हैं जिनकी न तो वास्तविक आवश्यकता थी और न ही गुणवत्ता का ध्यान रखा गया। आरोप है कि पंचायत के जिम्मेदारों और तकनीकी अमले की मिलीभगत से शासन की लाखों रुपये की राशि का दुरुपयोग किया गया है।
खेत में बना दी 15 लाख की पुलिया, जहां न नदी न नाला
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2025 में 15वें वित्त आयोग जनपद मद से करीब 15 लाख रुपये की लागत से एक रपटा पुलिया का निर्माण कराया गया। शासन के स्वीकृत स्टिमेट के अनुसार यह पुलिया जीवित नाले पर बननी थी, ताकि वर्षा के दौरान जल निकासी सुचारु रह सके।

लेकिन आरोप है कि सरपंच, सचिव और इंजीनियर ने मनमाने ढंग से जेसीबी मशीन से खेत में एक कृत्रिम नाली बनाकर वहां पुलिया खड़ी कर दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि उस स्थान पर न तो पहले कोई नाला था और न ही पानी का बहाव होता है। आज भी आसपास के किसान उसी खेत में खेती कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस पुलिया में वास्तविक खर्च तीन लाख रुपये से अधिक नहीं हुआ होगा, जबकि कागजों में 15 लाख की लागत दर्शाकर भुगतान कर दिया गया। आरोप है कि इंजीनियर और संबंधित अधिकारियों ने मूल्यांकन कर फर्जी बिलों का भुगतान करा दिया।
सीसी सड़क निर्माण में भी अनियमितता, कुछ ही महीनों में उखड़ने लगी:
ग्राम पंचायत सालरगोंदी में हाल ही में कांसीराम के घर से दलबीर सिंह के घर तक सीसी सड़क का निर्माण कराया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता के मानकों की अनदेखी की गई।


बताया जा रहा है कि निर्माण के समय न तो पर्याप्त पानी का छिड़काव किया गया और न ही मानक के अनुसार सामग्री का उपयोग किया गया। परिणाम यह है कि कुछ ही समय में सड़क की सतह उखड़ने लगी है।
इसी सड़क में बनाई गई कल्वर्ट पुलिया को भी ग्रामीणों ने गुणवत्ताहीन बताया है। उनका कहना है कि यदि तकनीकी जांच कराई जाए तो निर्माण में की गई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
पहले से बने डैम के पास ही 10 लाख का नया निर्माण:
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर दोहराव भी किया जा रहा है। आरोप है कि जहां पहले से ही एक स्टॉप डैम मौजूद है, वहीं करीब 200 मीटर की दूरी पर फिर से लगभग 10 लाख रुपये की लागत से नया डैम बना दिया गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार उस स्थान पर दूसरे डैम की आवश्यकता ही नहीं थी। इसके बावजूद निर्माण कराकर शासन की राशि का आहरण कर लिया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह कार्य भी तकनीकी अमले की मिलीभगत से कराया गया है।
स्कूल की 15 लाख की बाउंड्रीवाल खंडहर में तब्दील:
सालरगोंदी के भैंसान टोला स्थित प्राथमिक शाला सरई पतेरा में करीब 15 लाख रुपये की लागत से बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया गया था। ग्रामीणों के अनुसार यह निर्माण वर्ष 2013 के आसपास बताया जाता है, लेकिन आज यह पूरी तरह जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है।


बाउंड्रीवाल में जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं और अब तक स्कूल में मुख्य गेट भी नहीं लगाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि दीवार की हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो यह कई दशकों पुरानी हो।
ग्रामीणों की मांग: हो तकनीकी व वित्तीय जांच:
ग्रामीणों ने इन सभी निर्माण कार्यों की निष्पक्ष तकनीकी और वित्तीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्यों के स्टिमेट, माप पुस्तिका और बिलों की बारीकी से जांच कराई जाए तो पूरे मामले का सच सामने आ सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि अनियमितताओं के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ वास्तव में ग्रामीणों तक पहुंच सके।


