इच्छामृत्यु के बाद, अंगदान से 5 लोगों को जिंदगी देकर जाएंगे हरीश राणा . . . ?

दुनिया को अलविदा कहेंगे पर अमर रहेंगे गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा, जो पिछले 13 साल से कॉमा में हैं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति मिली है।
इस दर्दनाक फैसले के बीच उनके माता-पिता ने एक बड़ा और प्रेरणादायक कदम उठाया है, वो कदम है अंगदान।
डॉक्टरों के मुताबिक अगर मेडिकल जांच में अंग सही पाए जाते हैं, तो लीवर, किडनी, लंग्स और आंखों के कॉर्निया दान करके करीब 5 लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है।
एक परिवार का दर्द लेकिन उसी दर्द से कई जिंदगियों में उम्मीद की रोशनी।


