शहडोल में रिश्वतखोरी पर लोकायुक्त का शिकंजा, जयसिंहनगर थाने का एएसआई हिरासत में

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- शहडोल में रिश्वतखोरी पर लोकायुक्त का शिकंजा, जयसिंहनगर थाने का एएसआई हिरासत में
- शहडोल जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की सख्त कार्रवाई सामने आई है, जिसने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। जयसिंहनगर थाने में पदस्थ एक सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) को रिश्वत लेने के आरोप में लोकायुक्त टीम ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि आरोपी अधिकारी पर जांच प्रभावित करने और आरोपियों को राहत दिलाने के नाम पर पैसे मांगने का आरोप है। मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई, जो ग्राम गंधियां निवासी हरी दीन साहू द्वारा लोकायुक्त कार्यालय रीवा में दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार उसके भाई की सड़क दुर्घटना में मौत हो जाने के बाद ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके चलते पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया था। इसी मामले की जांच संबंधित एएसआई के पास थी। आरोप है कि जांच अधिकारी ने मामले में नामजद लोगों को राहत देने और जमानत में सहायता करने के एवज में प्रति व्यक्ति रकम की मांग की। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसने पहले ही आरोपी को कुछ राशि दे दी थी, जबकि अन्य लोगों से भी पैसे मांगे जा रहे थे। इस पूरे घटनाक्रम के समर्थन में ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे साक्ष्य भी लोकायुक्त टीम को सौंपे गए। लोकायुक्त द्वारा प्रारंभिक जांच और सत्यापन के बाद कार्रवाई की योजना बनाई गई। टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए ट्रैप बिछाया, लेकिन आरोपी को इसकी भनक लग गई और उसने मौके पर लेन-देन से बचने की कोशिश की। इसके बावजूद पूर्व में प्राप्त साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए लोकायुक्त अधिकारियों ने आरोपी एएसआई को सीधे थाने से हिरासत में ले लिया। सूत्रों के अनुसार आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप की स्थिति है और अन्य अधिकारियों में भी सतर्कता बढ़ गई है। यह कार्रवाई एक बार फिर यह संदेश देती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हैं और किसी भी स्तर पर अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय लोगों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
- एहसान खान
शहडोल जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की सख्त कार्रवाई सामने आई है, जिसने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। जयसिंहनगर थाने में पदस्थ एक सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) को रिश्वत लेने के आरोप में लोकायुक्त टीम ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि आरोपी अधिकारी पर जांच प्रभावित करने और आरोपियों को राहत दिलाने के नाम पर पैसे मांगने का आरोप है।
मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई, जो ग्राम गंधियां निवासी हरी दीन साहू द्वारा लोकायुक्त कार्यालय रीवा में दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार उसके भाई की सड़क दुर्घटना में मौत हो जाने के बाद ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके चलते पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया था। इसी मामले की जांच संबंधित एएसआई के पास थी।
आरोप है कि जांच अधिकारी ने मामले में नामजद लोगों को राहत देने और जमानत में सहायता करने के एवज में प्रति व्यक्ति रकम की मांग की। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसने पहले ही आरोपी को कुछ राशि दे दी थी, जबकि अन्य लोगों से भी पैसे मांगे जा रहे थे। इस पूरे घटनाक्रम के समर्थन में ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे साक्ष्य भी लोकायुक्त टीम को सौंपे गए।
लोकायुक्त द्वारा प्रारंभिक जांच और सत्यापन के बाद कार्रवाई की योजना बनाई गई। टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए ट्रैप बिछाया, लेकिन आरोपी को इसकी भनक लग गई और उसने मौके पर लेन-देन से बचने की कोशिश की। इसके बावजूद पूर्व में प्राप्त साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए लोकायुक्त अधिकारियों ने आरोपी एएसआई को सीधे थाने से हिरासत में ले लिया।
सूत्रों के अनुसार आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप की स्थिति है और अन्य अधिकारियों में भी सतर्कता बढ़ गई है।
यह कार्रवाई एक बार फिर यह संदेश देती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हैं और किसी भी स्तर पर अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय लोगों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई, जो ग्राम गंधियां निवासी हरी दीन साहू द्वारा लोकायुक्त कार्यालय रीवा में दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार उसके भाई की सड़क दुर्घटना में मौत हो जाने के बाद ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके चलते पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया था। इसी मामले की जांच संबंधित एएसआई के पास थी।
आरोप है कि जांच अधिकारी ने मामले में नामजद लोगों को राहत देने और जमानत में सहायता करने के एवज में प्रति व्यक्ति रकम की मांग की। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसने पहले ही आरोपी को कुछ राशि दे दी थी, जबकि अन्य लोगों से भी पैसे मांगे जा रहे थे। इस पूरे घटनाक्रम के समर्थन में ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे साक्ष्य भी लोकायुक्त टीम को सौंपे गए।
लोकायुक्त द्वारा प्रारंभिक जांच और सत्यापन के बाद कार्रवाई की योजना बनाई गई। टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए ट्रैप बिछाया, लेकिन आरोपी को इसकी भनक लग गई और उसने मौके पर लेन-देन से बचने की कोशिश की। इसके बावजूद पूर्व में प्राप्त साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए लोकायुक्त अधिकारियों ने आरोपी एएसआई को सीधे थाने से हिरासत में ले लिया।
सूत्रों के अनुसार आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप की स्थिति है और अन्य अधिकारियों में भी सतर्कता बढ़ गई है।
यह कार्रवाई एक बार फिर यह संदेश देती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हैं और किसी भी स्तर पर अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्थानीय लोगों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।


