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ब्यौहारी कॉलेज में शासकीय संपत्ति की दुर्दशा, इस्तेमाल योग्य कुर्सियां भी खुले में पड़ीं

NEWS DESK
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ब्यौहारी कॉलेज में शासकीय संपत्ति की दुर्दशा, इस्तेमाल योग्य कुर्सियां भी खुले में पड़ीं

कबाड़ के भाव सामान बेचने की तैयारी की चर्चा, प्राचार्य की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल; जांच और जवाबदेही की मांग

*विनय द्विवेदी ब्यौहारी* । शहडोल जिले के ब्यौहारी स्थित पंडित रामकिशोर शुक्ल शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में शासकीय संपत्ति के रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। महाविद्यालय परिसर में कुर्सियों सहित अन्य सामान खुले में रखा हुआ दिखाई दे रहा है। हैरानी की बात यह है कि वीडियो में दिखाई देने वाली कुछ कुर्सियां अभी भी बैठने योग्य नजर आ रही हैं, इसके बावजूद उन्हें सुरक्षित रखने और उपयोग में लेने के बजाय खुले में छोड़ दिया गया है। इससे महाविद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली और शासकीय संसाधनों के संरक्षण को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

उपयोग के योग्य सामान को खुले में छोड़ने की जरूरत क्यों?

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प्राप्त वीडियो में महाविद्यालय की कुर्सियां और अन्य सामग्री खुले में रखी दिखाई दे रही हैं। इन सामग्रियों को सुरक्षित स्थान पर रखने, आवश्यकतानुसार मरम्मत कराने और उपयोग में लेने के बजाय इस तरह छोड़ देना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि इन कुर्सियों का उपयोग संभव है, तो इन्हें कक्षाओं, कार्यालयों अथवा अन्य आवश्यक स्थानों पर इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, यदि कुछ सामान मरम्मत योग्य है, तो उसे दुरुस्त कराकर दोबारा उपयोग में लेने की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए।

शासकीय संस्थानों में उपलब्ध संसाधन जनता के धन से खरीदे जाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा, उचित रखरखाव और अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। लेकिन यदि उपयोग योग्य सामान उचित देखरेख के अभाव में खराब होने लगे, तो यह न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि सरकारी धन के उपयोग पर भी सवाल खड़े करता है।

*कबाड़ के भाव बिक्री की तैयारी की चर्चा*

महाविद्यालय में रखे सामान को कबाड़ के रूप में बेचने की तैयारी किए जाने की चर्चा भी सामने आ रही है। हालांकि, इस संबंध में बिक्री की प्रक्रिया, सामान के मूल्यांकन अथवा नीलामी की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में यह आवश्यक है कि महाविद्यालय प्रबंधन स्पष्ट करे कि संबंधित सामान को अनुपयोगी घोषित किया गया है या नहीं और यदि उसे हटाने अथवा बेचने की प्रक्रिया चल रही है, तो उसके लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

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यदि सामान उपयोग योग्य है, तो उसे कबाड़ में बेचने से पहले उसकी वास्तविक स्थिति का तकनीकी परीक्षण और उपयोगिता का आकलन किया जाना चाहिए। वहीं, यदि कोई सामग्री वास्तव में अनुपयोगी है, तो उसे नियमानुसार दर्ज कर उचित प्रक्रिया के तहत निस्तारित किया जाना चाहिए। इससे किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका दूर होगी और शासकीय संपत्ति के निपटान में पारदर्शिता बनी रहेगी।

*प्राचार्य की जिम्मेदारी पर सवाल*

महाविद्यालय में रखी शासकीय सामग्री की सुरक्षा और उचित रखरखाव की जिम्मेदारी प्रबंधन की होती है। ऐसे में परिसर में सामान खुले में पड़े होने का मामला सामने आने के बाद प्राचार्य की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि समय रहते सामग्री को सुरक्षित स्थान पर रखा जाता और उपयोग योग्य सामान का उपयोग सुनिश्चित किया जाता, तो उसे खराब होने से बचाया जा सकता था।

हालांकि, इस मामले में प्राचार्य की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए महाविद्यालय प्रबंधन का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।

*जांच हो तो सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति*

इस पूरे मामले में संबंधित विभाग के अधिकारियों को महाविद्यालय परिसर में रखी सामग्री का भौतिक सत्यापन कराना चाहिए। जांच में यह पता लगाया जाना चाहिए कि कितनी कुर्सियां और अन्य सामग्री उपयोग योग्य हैं, कितनी मरम्मत के बाद इस्तेमाल की जा सकती हैं और कितनी वास्तव में अनुपयोगी हैं। इसके साथ ही सामान के रखरखाव, स्टॉक रजिस्टर में दर्ज विवरण और प्रस्तावित निस्तारण की प्रक्रिया की भी जांच की जानी चाहिए।

यदि जांच में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारों की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, उपयोग योग्य सामग्री को सुरक्षित रखकर उसका दोबारा उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

*अब जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब की उम्मीद*

पंडित रामकिशोर शुक्ल शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में शासकीय संपत्ति की स्थिति ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या सरकारी संसाधनों का संरक्षण केवल कागजों तक सीमित रह गया है? जब एक ओर शैक्षणिक संस्थानों में संसाधनों की आवश्यकता बनी रहती है, वहीं दूसरी ओर उपयोग योग्य सामान खुले में पड़ा दिखाई दे, तो इसकी जांच और समीक्षा जरूरी हो जाती है।

*अब देखना यह है कि* महाविद्यालय प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या परिसर में रखी सामग्री का सत्यापन कर उसे सुरक्षित किया जाएगा, या फिर शासकीय संपत्ति की दुर्दशा पर जिम्मेदारों की चुप्पी बनी रहेगी।

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