पीने के पानी में यूरेनियम और भारी धातुओं की जांच तेज़, अर्श सच्चर ने की साइंटिफिक सैंपलिंग की मांग…

फरीदकोट, 2 मई (अलेक्जेंडर डिसूजा):
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के ‘पारदर्शी प्रशासन’ और ‘स्वस्थ पंजाब’ के विजन को अमलीजामा पहनाते हुए फरीदकोट में पानी की गुणवत्ता सुधारने की कवायद तेज़ हो गई है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और समाजसेवी अर्श सच्चर ने बताया कि प्रशासन अब जिले में पानी के नमूनों की वैज्ञानिक तरीके से जांच करने जा रहा है।
शिकायत पर त्वरित एक्शन:
अर्श सच्चर के अनुसार, पानी की खराब गुणवत्ता को लेकर पंजाब शिकायत पोर्टल और सेंट्रल CPGRAMS पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस पर संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित बैठक बुलाई।
एक्शन लेटर नंबर: 3892-97 (दिनांक 29-04-2026)
प्रशासन का निर्णय: पानी की नियमित टेस्टिंग और मॉनिटरिंग के लिए प्रशासन सहमत हो गया है।
इन घातक तत्वों की होगी जांच:
सच्चर ने मांग की है कि जांच केवल खानापूर्ति न हो, बल्कि सर्टिफाइड लैबोरेटरी में निम्नलिखित पैरामीटर्स की गहन जांच की जाए:-
रेडियोधर्मी तत्व: यूरेनियम।
भारी धातुएं: आर्सेनिक, लेड (सीसा), कैडमियम और मरकरी (पारा)।
अन्य पैरामीटर्स: फ्लोराइड, नाइट्रेट और TDS।
“साफ पानी हर नागरिक का बुनियादी हक है। हमारा मकसद टकराव नहीं, बल्कि सरकार को सही ग्राउंड फीडबैक देकर लोगों की सेहत की रक्षा करना है। अगर कहीं पानी पीने लायक नहीं मिलता, तो सरकार तुरंत वैकल्पिक और स्थाई इंतजाम सुनिश्चित करेगी”: अर्श सच्चर, सीनियर नेता (आप )।
‘पब्लिक फर्स्ट’ नीति पर जोर:
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुहिम फरीदकोट शहर के अलावा सरकारी अस्पतालों, स्कूलों, वाटर वर्क्स और ग्रामीण इलाकों में भी समान रूप से चलाई जानी चाहिए। ‘आप’ सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
न्यूज़: 2-2,
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