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ब्यौहारी में खुलेआम बाल मजदूरी का खेल

NEWS DESK
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*ब्यौहारी में खुलेआम बाल मजदूरी का खेल*

दुकानों से लेकर होटल-ढाबों और गैरेजों तक नाबालिगों से कराया जा रहा काम, मंडलम अध्यक्ष ने बाल कल्याण समिति को भेजा पत्र

*ब्यौहारी/शहडोल* । शहडोल जिले के ब्यौहारी क्षेत्र में बाल मजदूरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि क्षेत्र की कई किराना दुकानों, होटल-ढाबों, चाय की दुकानों, रेस्टोरेंट, मोटर गैरेज, ईंट-भट्ठों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराई जा रही है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और स्कूल बैग होने चाहिए, उसी उम्र में उनसे दुकानों और प्रतिष्ठानों में काम कराया जाना बाल संरक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है।

मामले को लेकर ब्यौहारी मंडलम कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विनय द्विवेदी ने बाल कल्याण समिति, जिला शहडोल को पत्र सौंपकर ब्यौहारी क्षेत्र में बाल मजदूरी के खिलाफ तत्काल विशेष अभियान चलाने और दोषी प्रतिष्ठान संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

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*किताबों की जगह बच्चों के हाथों में काम का बोझ*

शिकायत में कहा गया है कि आर्थिक परिस्थितियों का फायदा उठाकर कम उम्र के बच्चों से विभिन्न स्थानों पर काम कराया जा रहा है। कई बच्चे सुबह से शाम तक दुकानों, होटलों और अन्य प्रतिष्ठानों में काम करते नजर आते हैं। इससे उनकी पढ़ाई छूटने के साथ-साथ उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नाबालिग बच्चों से खुलेआम काम कराया जा रहा है तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इन प्रतिष्ठानों में काम करने वाले बच्चों की जानकारी नहीं है, या फिर जांच और कार्रवाई की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है?

*जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर भी उठे सवाल*

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मंडलम अध्यक्ष विनय द्विवेदी ने बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष श्री मती कल्याणी बाजपेयी को पत्र के माध्यम से मांग की है कि ब्यौहारी क्षेत्र में व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया जाए। किराना दुकानों, होटल, ढाबों, चाय की दुकानों, गैरेज, ईंट-भट्ठों और अन्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर यह पता लगाया जाए कि कहीं नाबालिग बच्चों से श्रम तो नहीं कराया जा रहा है।

उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि जांच के दौरान बाल मजदूरी का मामला सामने आता है तो संबंधित प्रतिष्ठान संचालक के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराकर उनके पुनर्वास और शिक्षा से जोड़ने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

‘ *कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति नहीं, चले अभियान* ‘

विनय द्विवेदी ने कहा कि बाल मजदूरी जैसे गंभीर विषय पर महज औपचारिक जांच या एक-दो प्रतिष्ठानों तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए। पूरे ब्यौहारी क्षेत्र में अभियान चलाकर वास्तविक स्थिति सामने लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य किसी भी आर्थिक गतिविधि से अधिक महत्वपूर्ण है और उन्हें मजदूरी के बजाय शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए।

पत्र में बाल मजदूरी की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की गई है। अब देखना यह होगा कि बाल कल्याण समिति और संबंधित विभाग इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हैं और ब्यौहारी में बाल मजदूरी के खिलाफ धरातल पर कार्रवाई कब शुरू होती है।

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