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जनसुनवाई बनी जनविश्वास की पहचान: बढ़ते आवेदकों की संख्या ने बढ़ाया प्रशासन पर भरोसा

admin
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जनसुनवाई बनी जनविश्वास की पहचान: बढ़ते आवेदकों की संख्या ने बढ़ाया प्रशासन पर भरोसा

 

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से त्वरित निराकरण, पेयजल, मेडिकल टीम और आधार अपडेट जैसी सुविधाओं से आमजन को राहत

 

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फैज मोहम्मद, उमरिया

उमरिया जिले में आयोजित होने वाली कलेक्टर जनसुनवाई अब केवल शिकायत दर्ज कराने का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि यह आमजन की समस्याओं के समाधान का एक भरोसेमंद मंच बनकर उभरी है। जिले के दूरस्थ ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक के लोग बड़ी उम्मीद और विश्वास के साथ अपनी समस्याएं लेकर कलेक्ट्रेट पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ सप्ताहों में जनसुनवाई में आने वाले आवेदकों की संख्या लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।

 

नवागत कलेक्टर राखी सहाय के नेतृत्व में जनसुनवाई व्यवस्था अधिक प्रभावी, संवेदनशील और जनहितैषी बनती जा रही है। प्रशासन द्वारा शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। जनसुनवाई के दौरान जिले के एसडीएम, तहसीलदार और विभिन्न विभागों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधे जुड़े रहते हैं, जिससे शिकायतें तत्काल संबंधित अधिकारियों तक पहुंचती हैं और कई मामलों में मौके पर ही कार्रवाई सुनिश्चित हो जाती है।

 

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वर्षों का इंतजार खत्म, जनसुनवाई ने दिलाई 4 लाख रुपये की सहायता

जनसुनवाई की उपयोगिता और प्रभावशीलता का एक भावुक उदाहरण हाल ही में देखने को मिला। ग्राम चंदोल निवासी सुखवंती बाई बैगा पिछले कई वर्षों से अपने पति स्वर्गीय दशईया बैगा की असामयिक मृत्यु के बाद आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिए प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रही थीं। विभिन्न कारणों से उनकी सहायता राशि लंबित थी।

पिछले मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर राखी सहाय ने स्वयं मामले की गंभीरता को समझते हुए उन्हें 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत कर अपने हाथों से प्रदान की। उल्लेखनीय है कि दशईया बैगा की 15 अक्टूबर 2024 को चंदवार स्थित तालाब में डूबने से मृत्यु हो गई थी। लंबे इंतजार के बाद मिली यह सहायता सुखवंती बाई के लिए बड़ी राहत साबित हुई। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि जनसुनवाई अब लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का माध्यम बन रही है।

 

लगातार बढ़ रहा आवेदकों का ग्राफ

जनसुनवाई में पहुंचने वाले लोगों की संख्या प्रशासन के प्रति बढ़ते विश्वास को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो—

 

2 मई को 69 आवेदक पहुंचे।

12 मई को संख्या बढ़कर 92 हुई।

19 मई को 107 लोगों ने अपनी समस्याएं रखीं।

26 मई को यह आंकड़ा 135 तक पहुंच गया।

2 जून को आयोजित जनसुनवाई में करीब 131 आवेदकों ने अपनी शिकायतें एवं समस्याएं प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत कीं।

 

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जनसुनवाई के प्रति लोगों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है और अधिक से अधिक नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए इस मंच का उपयोग कर रहे हैं।

 

आमजन की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं

प्रशासन द्वारा जनसुनवाई में आने वाले लोगों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। कलेक्ट्रेट परिसर में बैठने की समुचित व्यवस्था, शुद्ध पेयजल उपलब्धता, स्वास्थ्य परीक्षण के लिए चिकित्सकीय दल तथा आधार कार्ड अपडेट जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

इसके अलावा जो लोग स्वयं आवेदन लिखने में असमर्थ हैं, उनके लिए विशेष रूप से कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जो उनकी समस्याओं को सुनकर आवेदन तैयार करने में सहायता करते हैं। इस व्यवस्था से ग्रामीण एवं अशिक्षित नागरिकों को काफी सुविधा मिल रही है।

प्रशासन और जनता के बीच मजबूत हो रहा भरोसे का रिश्ता

गौरतलब है कि पहले जनसुनवाई में पहुंचने वाले लोगों की संख्या अपेक्षाकृत कम हुआ करती थी, लेकिन अब हर सप्ताह सौ से अधिक लोगों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि प्रशासन और आमजन के बीच विश्वास का रिश्ता लगातार मजबूत हो रहा है। बढ़ती संख्या केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि लोगों को अब अपनी समस्याओं के समाधान की वास्तविक उम्मीद दिखाई दे रही है।

संवेदनशील प्रशासनिक पहल, त्वरित कार्रवाई और जनहितकारी व्यवस्थाओं ने उमरिया की जनसुनवाई को वास्तव में “जन-विश्वास और जन-समाधान का केंद्र” बना दिया है। जिले में यह व्यवस्था सुशासन और जवाबदेही की एक सकारात्मक मिसाल के रूप में उभर रही है।

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