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दिल की नसों में रुकावट का कैसे पता चलता है एंजियोग्राफी से

admin
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एंजियोग्राफी से दिल की नसों में रुकावट का कैसे पता चलता है?

 

हमारे दिल को लगातार काम करने के लिए ऑक्सीजन और पोषण की जरूरत होती है। यह ऑक्सीजन दिल तक कोरोनरी आर्टरी यानी दिल की छोटी-छोटी धमनियों के द्वारा पहुँचती है। लेकिन जब इन धमनियों के अंदर चर्बी, कोलेस्ट्रॉल, कैल्शियम या प्लाक जमा होने लगता है, तो रास्ता संकरा हो जाता है। इसी को आम भाषा में दिल की नसों में रुकावट या ब्लॉकेज कहा जाता है।

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जब ब्लॉकेज बढ़ जाती है, तो दिल की मांसपेशियों तक खून कम पहुँचता है। ऐसे में सीने में दर्द, सांस फूलना, भारीपन, पसीना आना या हार्ट अटैक जैसी स्थिति हो सकती है।

 

 

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एंजियोग्राफी क्या होती है?

 

एंजियोग्राफी एक मेडिकल टेस्ट है, जिसमें डॉक्टर दिल की नसों के अंदर खून का रास्ता देखकर पता लगाते हैं कि कहीं कोई नस संकरी या बंद तो नहीं है।

 

इसे ऐसे समझिए:

 

जैसे किसी पाइप में पानी कम आ रहा हो, तो हम पाइप के अंदर रुकावट देखने की कोशिश करते हैं। उसी तरह एंजियोग्राफी में डॉक्टर दिल की धमनियों के अंदर खून का रास्ता देखते हैं।

 

 

एंजियोग्राफी कैसे की जाती है?

 

एंजियोग्राफी के दौरान डॉक्टर एक बहुत पतली नली जैसी चीज़, जिसे कैथेटर कहा जाता है, शरीर की किसी बड़ी नस या धमनी में डालते हैं। अधिकतर यह कैथेटर हाथ की कलाई या जांघ के पास से डाला जाता है।

 

फिर इस कैथेटर को धीरे-धीरे दिल की नसों तक पहुँचाया जाता है। इसके बाद उसमें एक खास दवा डाली जाती है, जिसे कॉन्ट्रास्ट डाई कहा जाता है।

 

यह डाई खून के साथ दिल की धमनियों में फैलती है और एक्स-रे मशीन पर नसों का रास्ता साफ दिखाई देने लगता है।

 

 

कॉन्ट्रास्ट डाई का काम क्या होता है?

 

हमारे शरीर की सामान्य नसें एक्स-रे में साफ दिखाई नहीं देतीं। इसलिए डॉक्टर एक खास रंगीन दवा यानी कॉन्ट्रास्ट डाई डालते हैं।

 

यह डाई जहाँ-जहाँ खून के साथ जाती है, वहाँ की नसें एक्स-रे स्क्रीन पर साफ दिखने लगती हैं। अगर किसी जगह नस संकरी है, तो वहाँ डाई का रास्ता पतला दिखाई देता है। अगर कोई जगह ज्यादा बंद है, तो डाई आगे ठीक से नहीं जा पाती।

 

यहीं से डॉक्टर समझ जाते हैं कि ब्लॉकेज कहाँ है और कितनी है।

 

 

स्क्रीन पर ब्लॉकेज कैसे दिखती है?

 

एंजियोग्राफी में डॉक्टर लाइव एक्स-रे वीडियो देखते हैं। इसमें दिल की धमनियों में बहती हुई डाई दिखाई देती है।

 

जहाँ खून का रास्ता सामान्य होता है, वहाँ नस साफ और पूरी खुली दिखाई देती है।

लेकिन जहाँ नस संकरी हो जाती है, वहाँ डाई का बहाव पतला, धीमा या रुकता हुआ दिखाई देता है।

 

इसी आधार पर डॉक्टर बताते हैं कि ब्लॉकेज 30%, 50%, 70% या 90% तक है।

 

 

ब्लॉकेज क्यों होती है?

 

दिल की नसों में रुकावट बनने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे:

 

ज्यादा कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा, तनाव, कम शारीरिक मेहनत और गलत खान-पान।

 

धीरे-धीरे धमनियों की अंदरूनी दीवारों पर प्लाक जमा होता रहता है। शुरुआत में व्यक्ति को कोई खास लक्षण नहीं दिखते, लेकिन जब रास्ता बहुत संकरा हो जाता है, तब समस्या महसूस होने लगती है।

 

 

एंजियोग्राफी से क्या-क्या पता चलता है?

 

एंजियोग्राफी से डॉक्टर यह देख पाते हैं कि दिल की कौन-सी नस में रुकावट है, रुकावट कितनी ज्यादा है, कितनी जगह ब्लॉकेज है और खून का बहाव दिल तक ठीक से पहुँच रहा है या नहीं।

 

इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे का इलाज तय किया जाता है।

 

 

एंजियोग्राफी के बाद इलाज कैसे तय होता है?

 

अगर ब्लॉकेज कम हो, तो डॉक्टर दवाइयों, खान-पान में बदलाव और जीवनशैली सुधार की सलाह दे सकते हैं।

 

अगर ब्लॉकेज ज्यादा हो, तो डॉक्टर एंजियोप्लास्टी और स्टेंट लगाने की सलाह दे सकते हैं।

 

अगर कई नसों में ज्यादा रुकावट हो या स्थिति गंभीर हो, तो कुछ मरीजों में बायपास सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।

 

यानी एंजियोग्राफी खुद इलाज नहीं है, बल्कि यह एक जांच है, जिससे डॉक्टर को सही इलाज का रास्ता समझ आता है।

 

 

आसान उदाहरण से समझिए

 

मान लीजिए सड़क पर ट्रैफिक चल रहा है। अगर सड़क पूरी खुली है, तो गाड़ियाँ आराम से चलेंगी। लेकिन अगर सड़क पर कहीं पत्थर, मिट्टी या जाम लग जाए, तो गाड़ियों की स्पीड कम हो जाएगी।

 

ठीक ऐसा ही दिल की नसों में होता है।

खुली नस = खून का अच्छा बहाव

संकरी नस = खून का कम बहाव

बंद नस = हार्ट अटैक का खतरा

 

एंजियोग्राफी इसी “सड़क के जाम” को देखने की जांच है।

 

 

निष्कर्ष

 

एंजियोग्राफी दिल की नसों का एक्स-रे जैसा टेस्ट है, जिसमें कॉन्ट्रास्ट डाई की मदद से डॉक्टर यह देखते हैं कि दिल की धमनियों में खून सही से बह रहा है या कहीं रुकावट है।

 

जहाँ डाई का रास्ता संकरा या रुकता हुआ दिखाई देता है, वहीं ब्लॉकेज होती है। इसी जांच से डॉक्टर तय करते हैं कि मरीज को दवा, स्टेंट या बायपास में से किस इलाज की जरूरत है।

 

नोट: सीने में दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक पसीना, बेचैनी या बाएं हाथ/जबड़े में दर्द जैसे लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए।

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