विधायक-कलेक्टर दिखा रहे थे हरी झंडी, उधर किसानों को छल गया उद्यानिकी विभाग
लाखों की दवाइयां सड़ीं, कुछ नदी में फेंके जाने का आरोप; जांच के घेरे में विभाग
यस न्यूज ब्यूरो | उमरिया
उमरिया जिले में एक ओर सरकार किसानों को आधुनिक खेती और नई तकनीकों से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर उद्यानिकी विभाग की कार्यप्रणाली ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी है। हाल ही में सरकार की महत्वाकांक्षी कृषि जागरूकता योजना के तहत गांव-गांव जाकर किसानों को नई तकनीकों और योजनाओं की जानकारी देने वाले प्रचार रथ को बांधवगढ़ विधायक और कलेक्टर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस दौरान अधिकारियों ने पाली क्षेत्र के धौरई गांव में सब्जी खेती का निरीक्षण भी किया और किसानों के हित में योजनाओं के सफल संचालन का भरोसा दिलाया।लेकिन इसी बीच उद्यानिकी विभाग की बड़ी लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार सामने आने से पूरे जिले में हड़कंप मच गया है।
10 लाख की दवाई किसानों तक पहुंची ही नहीं
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2024-25 में किसानों के लिए करीब 10 लाख रुपए मूल्य की कृषि उपयोगी दवाइयों की खरीदी की गई थी। इन दवाइयों का उद्देश्य किसानों की फसलों को रोगों और कीटों से बचाना था, लेकिन विभाग इन्हें किसानों तक पहुंचाने में पूरी तरह विफल रहा।
आरोप है कि विभाग ने कागजों में दवाइयों के वितरण का पूरा रिकॉर्ड तैयार कर लिया, जबकि हकीकत में जिले के तीनों ब्लॉकों में एक रुपये की दवाई तक किसानों को नहीं मिली। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकारी योजनाओं को सिर्फ कागजों में संचालित दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
एक्सपायरी दवाइयां कमरों में सड़ती रहीं
बताया जा रहा है कि लंबे समय तक वितरण न होने के कारण बड़ी मात्रा में दवाइयां एक्सपायर हो गईं। कुछ दवाइयां गोदामों और कमरों में पड़ी-पड़ी खराब होती रहीं, जबकि कुछ दवाइयों को कथित तौर पर विभागीय कर्मचारियों द्वारा पास की नदी में फेंक दिए जाने की भी चर्चा है।
सूत्रों का कहना है कि जब कलेक्टर तक शिकायत पहुंची और उन्होंने वितरण संबंधी फाइलें तलब कीं, तब विभाग में हड़कंप मच गया। कागजी रिकॉर्ड तो तैयार थे, लेकिन वास्तविक स्टॉक और वितरण की स्थिति सामने आने का डर अधिकारियों को सताने लगा।
—
नई दवाइयों के नीचे छिपाई गई पुरानी खेप
जानकारी के मुताबिक वर्ष 2025-26 का नया स्टॉक आते ही विभाग ने एक्सपायरी दवाइयों को नीचे दबाकर ऊपर नई दवाइयां रखवा दीं, ताकि जांच के दौरान वास्तविक स्थिति छिपाई जा सके। इतना ही नहीं, शिकायतों के बाद विभागीय स्तर पर खराब दवाइयों को बोरियों में भरकर हटाने और ठिकाने लगाने की भी कोशिश की गई।यह पूरा मामला अब विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
किसानों ने खोली विभाग की पोल
जब किसानों से बातचीत की गई तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें किसी प्रकार की दवाई नहीं मिली। किसानों का आरोप है कि विभाग केवल चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाकर बाकी किसानों को योजनाओं से वंचित कर रहा है।
किसानों ने कहा कि सरकार लगातार किसान हितैषी योजनाओं का प्रचार करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा। ऐसे में किसानों का भरोसा प्रशासनिक व्यवस्था से उठता जा रहा है।

सहायक संचालक का गोलमोल जवाब
मामले में जब सहायक संचालक उद्यानिकी झनक सिंह मरावी से सवाल किए गए तो उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा कि “यदि किसी कर्मचारी से गलती हुई है तो जांच कराई जाएगी।” वहीं कलेक्टर ने भी पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है।
हालांकि विभागीय अधिकारी का यह बयान किसानों को संतुष्ट नहीं कर पा रहा। लोगों का कहना है कि यदि दवाइयों का वितरण हुआ ही नहीं, तो जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
—
अब उठ रहे बड़े सवाल
किसानों के नाम पर खरीदी गई दवाइयां आखिर कहां गईं?
क्या वितरण केवल कागजों में दिखाया गया?
एक्सपायरी दवाइयों को छिपाने और नष्ट करने की कोशिश क्यों हुई?
क्या सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ?
दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?
उमरिया में सामने आया यह मामला केवल विभागीय लापरवाही नहीं, बल्कि किसान हितों से जुड़े सरकारी सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।





