*महक माटी की*
( विंध्य क्षेत्र की बघेली बोली )

बोर्ड परीक्षा का फॉर्म
साल 1960 मा हम दस लड़िका कक्षा आठ पास कइके खाली बइठ गयन,कारण स्कूल केवल मिडिल तक रहिस.

जुलाई 1960 मा मध्यप्रदेश केर शिक्षा मंत्री पंडित शंभू नाथ जी शुक्ल (पूर्व मुख्यमंत्री विघटित विंध्य प्रदेश राज्य) केर आगमन बुड़वा गांव मा भा. बुड़वा गढ़ी के इलाकेदार परिवार के दद्दा साहब के आग्रह मा शिक्षा मंत्री घोषणा किहिन के “बुड़वा मा हार्ई स्कूल इहै साल चालू होइ जई “.

हम सबै लड़िका लोग नवमी कक्षा मा भर्ती होय के लाने मिडिल स्कूल से टी.सी. लिहेन अऊ हाई स्कूल मा जमा कर दिहेन . इहै समय हम आपन जन्म तारीख देख लिहेन ते.
सन् 1962 मा, ग्यारवीं बोर्ड परीक्षा के खातिर, हमार प्रिन्सिपल आदरणीय श्री मदन मोहन लाल श्रीधर, परीक्षा फॉर्म भरावै के लाने खुद क्लास मा बइठ गें. सबै तेरह लड़िकन का फार्म दिहिन अऊ कहिन के “जन्म- तिथि केर काॅलम छोड़ि के सब लोग इया फॉर्म भर द्या. सबके फार्म भरै के बाद एक तरफ से सबसे जन्म तिथि पूछै लागें. बारह लड़िका कहिन के , हमहीं नहीं मालुम , आखिर मा हमार नम्बर आवा. हम दरवाजा के पास पहिले स्थान मा बइठत रहेन. हम ठाढ़ होइके कहेन कि ” शायद दो सितम्बर पैंतालीस.”
हमार प्रिन्सिपल साहब तुरतै कुर्सी छांड़ि के हमरे लघे आयें अउर सबके सामने धीरे से एक तमाचा हमरे बाऐं गाल मा मार दिहिन अउ वापस कुर्सी मा जाय के बइठ गें, फेर कहिन “तारीख त सही है,पर ‘शायद’ शब्द काहे बोल्या. अब आगे से :शायद शब्द” केर प्रयोग न कर् या.” ए से विश्वसनियता खतम होथी.

” जी सर.”
इया शिक्षा हमहीं जिन्दगी भर याद रही.आपन प्रशासनिक दायित्व मा हम सतर्क
होइ के अउर “उआ मार” का याद कइके , अपवाद छांड़ि के “शायद शब्द ” केर उपयोग करै से बचै केर कोशिश करतै रहि गैन .एमा कठिनाई त होत रही, पै समय कटिगा.—-
राम मणि यादव रायपुर


