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हाई टेंशन टॉवर बना मौत का जाल, 17 वर्षीय किशोर की दर्दनाक मौत

admin
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सीधी में लापरवाही का करंट: हाई टेंशन टॉवर बना मौत का जाल, 17 वर्षीय किशोर की दर्दनाक मौत

मध्यप्रदेश के सीधी जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने प्रशासनिक लापरवाही और कंपनियों की गैरजिम्मेदारी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के ग्राम पंचायत कुसमहर में 17 वर्षीय सौरभ मिश्रा की हाई टेंशन बिजली टॉवर से गिरकर मौत हो गई—एक ऐसी मौत, जिसे रोका जा सकता था, अगर सुरक्षा के इंतजाम होते।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सौरभ मिश्रा, जो स्वर्गीय मनोज मिश्रा के इकलौते पुत्र थे, गांव में लगे हाई टेंशन लाइन के टॉवर पर चढ़ गए। लेकिन यह चढ़ना उनकी जिंदगी का आखिरी कदम साबित हुआ। टॉवर पर किसी भी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था—न तो फेंसिंग, न चेतावनी बोर्ड, न ही कोई निगरानी—मौजूद नहीं थी। यही खुली लापरवाही इस दर्दनाक हादसे की सबसे बड़ी वजह बन गई।

सुरक्षा नहीं, सिर्फ खामियां: कंपनी की बड़ी चूक

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ग्रामीणों का साफ आरोप है कि टॉवर लगाने वाली कंपनी ने सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं किया। गांव के बीचों-बीच खड़ा यह टॉवर किसी खतरे की घंटी से कम नहीं था, लेकिन जिम्मेदारों ने आंखें मूंद रखीं। सवाल यह है कि क्या किसी की जान जाने के बाद ही सुरक्षा नियम याद आते हैं?

मुआवजा भी अधूरा, जिम्मेदारी भी गायब

मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि जिस जमीन पर यह टॉवर खड़ा किया गया, उसके मालिक को अब तक मुआवजा तक नहीं दिया गया। यानी एक तरफ जान चली गई, दूसरी तरफ अधिकार भी छीन लिए गए। यह दोहरी मार आखिर कब तक झेलेंगे ग्रामीण?

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

सौरभ अपने परिवार का इकलौता सहारा था। उसकी मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। घर में अब सन्नाटा और आंसुओं के सिवा कुछ नहीं बचा। गांव में भी मातम पसरा हुआ है और हर आंख नम है।

ग्रामीणों का आक्रोश: ‘दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई’

घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि:

पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो

टॉवर लगाने वाली कंपनी पर सख्त कार्रवाई की जाए

पीड़ित परिवार को तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए

भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं

बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का जीता-जागता उदाहरण है। अगर समय रहते सुरक्षा उपाय किए जाते, तो आज सौरभ जिंदा होता। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है या यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

सीधी से उठी यह दर्दनाक आवाज अब पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी है—लापरवाही की कीमत अब जान देकर चुकानी पड़ रही है।

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