ग्वालियर, अमरकंटक और रतलाम: विकास प्राधिकरणों में नई नियुक्तियों से प्रशासनिक हलचल
भोपाल से जारी आदेशों के तहत मध्य प्रदेश सरकार ने एक बार फिर प्रशासनिक सक्रियता दिखाते हुए राज्य के प्रमुख विकास प्राधिकरणों में नई नियुक्तियाँ की हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि इन नियुक्तियों का उद्देश्य लंबे समय से लंबित विकास कार्यों को गति देना और स्थानीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। आदेशों को उप सचिव सी.के. साधव के डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणित किया गया है और ये पदभार ग्रहण करते ही प्रभावी माने जाएंगे।
ग्वालियर में सबसे अहम बदलाव ग्वालियर विकास प्राधिकरण (GDA) में देखने को मिला है, जहाँ मधुसूदन भदौरिया को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि सुधीर गुप्ता और वेद प्रकाश शिवहरे को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार को उम्मीद है कि यह नई टीम शहर के शहरी ढांचे, आधारभूत सुविधाओं और अधूरी परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाएगी। ग्वालियर लंबे समय से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के अटके होने के कारण चर्चा में रहा है, ऐसे में यह नियुक्ति विशेष महत्व रखती है।
रतलाम और ग्वालियर से जुड़े विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SADA) में भी बदलाव किए गए हैं। अशोक शर्मा को अध्यक्ष और हरीश मेवाफरोश को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों को शासन ने अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए तत्काल प्रभाव से लागू किया है। माना जा रहा है कि इन क्षेत्रों में औद्योगिक और शहरी विस्तार की योजनाओं को अब नई दिशा मिल सकती है।
वहीं, धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण अमरकंटक में राजेन्द्र भारती को विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अमरकंटक नर्मदा नदी के उद्गम स्थल के रूप में प्रसिद्ध है और यहाँ विकास कार्यों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना हमेशा चुनौती रहा है। ऐसे में यह नियुक्ति क्षेत्र के समग्र और सुनियोजित विकास के लिए अहम मानी जा रही है।
इन सभी नियुक्तियों के साथ प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व स्थापित कर विकास योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुँचाने की रणनीति पर काम कर रही है, जिसका असर आने वाले समय में स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली दोनों पर दिखाई दे सकता है।





