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“शिक्षा या कारोबार?” — निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ युवा कांग्रेस का तीखा विरोध

admin
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“शिक्षा या कारोबार?” — निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ युवा कांग्रेस का तीखा विरोध

 

ब्यौहारी (जिला शहडोल, म.प्र.) | 15 अप्रैल 2026

 

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शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती व्यावसायिक प्रवृत्तियों को लेकर ब्यौहारी में अब आवाज़ बुलंद होने लगी है। ब्लॉक युवा कांग्रेस कमेटी, ब्यौहारी ने निजी स्कूलों की कथित मनमानी के खिलाफ प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में समिति के अध्यक्ष आयुष्मान ताम्रकार के नेतृत्व में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।

 

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होते ही क्षेत्र के कई निजी विद्यालयों ने बिना किसी ठोस आधार के ट्यूशन फीस और अन्य शुल्कों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। यह बढ़ोतरी न केवल शासन के नियमों के विपरीत बताई जा रही है, बल्कि मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों के लिए गंभीर आर्थिक संकट का कारण भी बन रही है।

 

किताबों और ड्रेस में ‘फिक्सिंग’ का आरोप

मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह सामने आया है कि कई स्कूलों द्वारा चुनिंदा निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें अनिवार्य कर दी गई हैं। अभिभावकों को इन्हें केवल स्कूल द्वारा तय की गई विशेष दुकानों से ही खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है। आरोप है कि इन दुकानों और स्कूल प्रबंधन के बीच कमीशन आधारित गठजोड़ है, जिससे अभिभावकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

 

यही स्थिति स्कूल ड्रेस के मामले में भी देखने को मिल रही है, जहां निर्धारित दुकानों से ही यूनिफॉर्म खरीदना अनिवार्य किया जा रहा है। बाजार में इन वस्तुओं की स्वतंत्र उपलब्धता न होने से अभिभावक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

 

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

युवा कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा है कि यह पूरा मामला “शिक्षा के नाम पर खुली कालाबाजारी” का उदाहरण है। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि इस पर तत्काल जांच कर दोषी स्कूलों और संबंधित पक्षों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि अभिभावकों को राहत मिल सके।

 

आंदोलन की चेतावनी

ब्लॉक युवा कांग्रेस कमेटी ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो संगठन व्यापक स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

 

स्थानीय अभिभावकों में रोष

इस पूरे मुद्दे को लेकर अभिभावकों में भी भारी आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि शिक्षा जैसी बुनियादी आवश्यकता को मुनाफे का जरिया बनाना बेहद चिंताजनक है और इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।

 

अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और आम जनता को राहत दिलाने के लिए कितनी जल्दी कदम उठाता है।

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