CM हेल्पलाइन में ‘फोर्स क्लोज’ का खेल!
बाणसागर फॉरेस्ट बैरियर पर अवैध वसूली के VIDEO के बाद भी अधिकारियों ने दी क्लीन चिट
जिसके खिलाफ शिकायत, उसी से कराई जांच — कागजी रिपोर्ट के दम पर दबा दिया गया मामला
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/बाणसागर/देवलौद से विशेष रिपोर्ट/ (पत्रकार विनय द्विवेदी)
प्रदेश सरकार भले ही भ्रष्टाचार पर “जीरो टॉलरेंस” का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही तस्वीर पेश कर रहे हैं। बाणसागर के देवलौद स्थित फॉरेस्ट बैरियर पर कथित अवैध वसूली का मामला अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।
बैरियर पर वाहनों से कथित रूप से की जा रही अवैध उगाही का वीडियो सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार माध्यमों में वायरल हुआ, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इतने गंभीर वीडियो साक्ष्य के बावजूद अधिकारियों ने शिकायत को “असत्य” बताते हुए CM हेल्पलाइन में “फोर्स क्लोज” करा दिया।
VIDEO में दिखी वसूली, फाइलों में सब ‘नियम अनुसार’
जानकारी के अनुसार, जागरूक नागरिकों द्वारा CM हेल्पलाइन में शिकायत क्रमांक 37819789 दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि देवलौद फॉरेस्ट बैरियर पर गुजरने वाले वाहनों से अवैध रूप से पैसे वसूले जा रहे हैं।
मामला तब और गंभीर हो गया जब इस कथित वसूली का वीडियो भी सामने आ गया। वीडियो में बैरियर पर वाहनों की आवाजाही के दौरान संदिग्ध लेन-देन दिखाई देने की बात कही जा रही है।लेकिन जांच प्रक्रिया ने पूरे मामले को सवालों के घेरे में ला दिया।
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‘चोर से पूछा — चोरी की या नहीं?’
जिस बैरियर पर आरोप, उसी प्रभारी से मांगी रिपोर्ट
सूत्रों के अनुसार, शिकायत की जांच स्वतंत्र एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारी से कराने के बजाय सीधे उसी बैरियर प्रभारी से प्रतिवेदन ले लिया गया, जिसके ऊपर आरोप लगाए गए थे।
बैरियर प्रभारी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि —
> “बैरियर से गुजरने वाले प्रत्येक वाहन की सघन जांच की जाती है। वैध वाहनों की पंजी में प्रविष्टि दर्ज होती है तथा किसी प्रकार की अवैध वसूली नहीं की जाती।”
इसके बाद अधिकारियों ने बिना मौके की स्वतंत्र जांच, बिना शिकायतकर्ता का पक्ष सुने और बिना वीडियो सत्यापन के उसी रिपोर्ट को आधार बनाकर शिकायत को “गलत” मान लिया।
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तीन दिन में खत्म हो गई ‘जांच’
दस्तावेजों के अनुसार,
27 अप्रैल 2026 को बैरियर प्रभारी द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया,
और 30 अप्रैल 2026 को शिकायत को “फोर्स क्लोज” करने की अनुशंसा दर्ज कर दी गई।
यानी महज तीन दिनों में वीडियो साक्ष्य वाले मामले की जांच पूरी कर दी गई।
अब सवाल उठ रहा है कि —
क्या वीडियो की तकनीकी जांच हुई?
क्या मौके का निरीक्षण किया गया?
क्या शिकायतकर्ता से संपर्क किया गया?
क्या किसी स्वतंत्र अधिकारी ने बयान दर्ज किए?
यदि नहीं, तो फिर शिकायत को झूठा मानने का आधार क्या था?
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CM हेल्पलाइन की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को आम जनता की समस्याओं के समाधान का सबसे भरोसेमंद मंच माना जाता है। लेकिन इस मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब “फोर्स क्लोज” भ्रष्टाचार छुपाने का नया हथियार बनता जा रहा है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने आपसी सांठगांठ कर मामले को दबाने की कोशिश की है, ताकि बैरियर पर चल रहे कथित अवैध वसूली के खेल पर पर्दा डाला जा सके।
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जनता की मांग — हो निष्पक्ष जांच
मामले के सामने आने के बाद अब स्थानीय नागरिक और सामाजिक संगठन मांग कर रहे हैं कि —
✔ वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कराई जाए
✔ बैरियर पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका की जांच हो
✔ शिकायत क्रमांक 37819789 को दोबारा खोला जाए
✔ पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो
✔ CM हेल्पलाइन में “फोर्स क्लोज” प्रक्रिया की समीक्षा की जाए
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अब निगाहें वरिष्ठ अधिकारियों पर
देवलौद फॉरेस्ट बैरियर का यह मामला अब केवल अवैध वसूली तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता और सरकारी शिकायत निवारण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बन चुका है।
अब देखना यह होगा कि वरिष्ठ अधिकारी वायरल वीडियो और उठते सवालों को गंभीरता से लेते हैं या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा।





