उप-हेडिंग:
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल — जनप्रतिनिधियों के गांव के पास ही गंभीर लापरवाही
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शहडोल, विनय द्विवेदी।
जिले के अंतिम छोर उप-ब्लॉक पपौंध स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निपानिया में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। यहां बिना किसी डॉक्टर की पदस्थापना के ही मरीजों का इलाज किया जा रहा है, इतना ही नहीं मरीजों को भर्ती भी किया जा रहा है। यह स्थिति न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि मरीजों की जान के साथ सीधा जोखिम भी पैदा कर रही है।
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बिना डॉक्टर चल रहा इलाज, भर्ती भी जारी
स्थानीय सूत्रों के अनुसार अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति के बावजूद नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारी ही मरीजों का उपचार कर रहे हैं। कई मामलों में गंभीर मरीजों को भी प्राथमिक स्तर पर ही रोका जा रहा है, जिससे उनकी हालत बिगड़ने का खतरा बना रहता है। समय पर उचित इलाज न मिलने के कारण बाद में मरीजों को रेफर करना पड़ता है।

जनप्रतिनिधियों के क्षेत्र में ही बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं
यह स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्रीय विधायक शरद जगलाल कोल एवं जिला पंचायत अध्यक्ष प्रभा मिश्रा के निवास गांव के समीप स्थित है। इसके बावजूद यहां स्वास्थ्य सुविधाओं की यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें न तो समय पर डॉक्टर मिलते हैं और न ही दवाएं, जिससे उन्हें निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
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नियमों की खुली अनदेखी:
स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार बिना डॉक्टर के किसी भी अस्पताल में मरीजों का भर्ती होना और इलाज किया जाना गंभीर अनियमितता है। इसके बावजूद निपानिया स्वास्थ्य केंद्र में यह सब खुलेआम जारी है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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गाइडलाइन बनाम हकीकत:
स्वास्थ्य विभाग मध्यप्रदेश एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की गाइडलाइन के अनुसार:
प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में कम से कम 4 विशेषज्ञ डॉक्टर (चिकित्सक, स्त्रीरोग विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सक, बाल रोग विशेषज्ञ) होना अनिवार्य है।
24×7 इमरजेंसी सेवाएं उपलब्ध रहनी चाहिए।
आवश्यक दवाएं, जांच सुविधा और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
गंभीर मरीजों को तत्काल उचित उपचार या रेफरल की व्यवस्था होनी चाहिए।
निपानिया स्वास्थ्य केंद्र की वास्तविक स्थिति:
एक भी डॉक्टर की नियमित पदस्थापना नहीं
नर्सिंग स्टाफ के भरोसे इलाज
दवाओं और मूलभूत सुविधाओं की कमी
समय पर उपचार न मिलने से मरीजों को बाहर रेफर
स्पष्ट है कि गाइडलाइन और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है।
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निरीक्षण में भी उजागर हुई थी अव्यवस्था:
गौरतलब है कि हाल ही में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अजय अवस्थी ने इस स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई की कमी, दवाओं की अनुपलब्धता और डॉक्टरों की कमी जैसी गंभीर खामियां सामने आई थीं। हालांकि इसके बाद भी व्यवस्थाओं में कोई ठोस सुधार नहीं हो सका।
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इनका कहना है:
विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. निशांत सिंह का कहना है:
“अस्पताल में वर्तमान में डॉक्टर पदस्थ नहीं हैं। डॉक्टर की नियुक्ति के लिए उच्च स्तर पर पत्र भेजा गया है।”

क्षेत्रवासियों का कहना है:
“यहां डॉक्टर नहीं होने के कारण छोटी से छोटी बीमारी के इलाज के लिए भी हमें रीवा, शहडोल या ब्यौहारी जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की परेशानी होती है।”
जांच और सुधार की मांग:
स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही स्वास्थ्य केंद्र में तत्काल डॉक्टरों की नियुक्ति और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई है।


