वन विभाग के नाके पर दस्तावेज जांच के नाम पर वसूली
स्टिंग ऑपरेशन में कर्मचारी का बड़ा खुलासा
विनय द्विवेदी ब्यौहारी – शहडोल जिले के ब्यौहारी ब्लॉक से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बाणसागर देवलौंद थाना क्षेत्र में वन विभाग के नाके पर दस्तावेज जांच के नाम पर वाहनों से कथित अवैध वसूली किए जाने का मामला सामने आया है। इस पूरे मामले का खुलासा एक स्टिंग ऑपरेशन के दौरान हुआ, जिसके बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार बाणसागर क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले वन विभाग द्वारा एक वन अवरोध देवलोंद वनोपज जांच नाका बनाया गया है। इस नाके पर रेत, लकड़ी, सरिया और कोयला जैसे सामान लेकर आने-जाने वाले भारी वाहनों से प्रति वाहन 20 से 30 रुपये तक की वसूली की जा रही है। वाहन चालकों का कहना है कि दस्तावेज जांच के नाम पर यह राशि नियमित रूप से ली जाती है।

स्टिंग ऑपरेशन में सामने आई सच्चाई:
स्टिंग ऑपरेशन के दौरान नाके पर तैनात एक वन कर्मी द्वारा सेवा शुल्क डिप्टी एवं रेंजर के मौखिक आदेश पर वसूली कर रहा है, यह वसूली उच्च अधिकारियों की जानकारी में होती है। कर्मचारी के अनुसार यह पैसा रेंजर और डिप्टी के नाम पर लिया जाता है। इस बयान के सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों में नाराज़गी:
इस खुलासे के बाद क्षेत्र के वाहन चालकों और स्थानीय लोगों में नाराज़गी देखी जा रही है। उनका कहना है कि दस्तावेज जांच के नाम पर लंबे समय से इस तरह की वसूली की जा रही है। कई वाहन चालकों ने बताया कि छोटी-छोटी रकम होने के कारण लोग विरोध नहीं कर पाते, लेकिन यह सिलसिला लगातार जारी है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग:
अब सवाल उठ रहा है कि आखिर वन विभाग के इस नाके पर इस तरह की वसूली कब से चल रही है और क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाएगी। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। यदि जांच होती है तो यह स्पष्ट हो पाएगा कि वसूली के इस पूरे मामले में किसकी भूमिका है और कब से यह सिलसिला चल रहा है।
इनका कहना:
यहां से कोई इस तरह का निर्देश नहीं है, पहले कभी जानकारी आई थी आप शिकायत करें मैं कार्यवाही करूंगा।
अशोक निगम ( रेंजर) वनमण्डल ब्यौहारी


