अपने ही स्कूल में लौटे संतोष मिश्रा, बच्चों को दे रहे कंप्यूटर शिक्षा: शिक्षा का ऋण चुकाने की प्रेरक पहल

शहडोल। कभी जिस सरकारी विद्यालय की कक्षा में बैठकर शिक्षा की पहली सीढ़ियाँ चढ़ी थीं, आज उसी विद्यालय में लौटकर नई पीढ़ी को कंप्यूटर शिक्षा देना शहडोल जिले के ग्राम छोहरी निवासी संतोष मिश्रा के लिए केवल एक संयोग नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी, अपने विद्यालय और अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक प्रेरक प्रयास है।

संतोष मिश्रा ने अपने गाँव के विद्यालय में विद्यार्थियों को कंप्यूटर एवं डिजिटल शिक्षा का प्रशिक्षण देकर यह संदेश दिया है कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल स्वयं आगे बढ़ना नहीं, बल्कि समाज को भी आगे बढ़ाना है। जिस विद्यालय ने उन्हें सीखने का अवसर दिया, आज उसी विद्यालय के बच्चों के बीच अपना ज्ञान और अनुभव साझा करना उनके लिए गर्व और आत्मसंतोष का विषय है।

उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को आधुनिक तकनीक और डिजिटल शिक्षा से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि गाँवों के विद्यार्थी तकनीकी रूप से सक्षम होंगे, तो वे भी देश और दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ सकेंगे।
आज जब अधिकांश लोग सफलता मिलने के बाद अपने गाँव और विद्यालय से दूर हो जाते हैं, ऐसे समय में संतोष मिश्रा की यह पहल समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण बनकर उभरी है। अपने ही विद्यालय में लौटकर बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा देना न केवल शिक्षा के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि अपनी जड़ों से जुड़कर समाज के विकास में योगदान देना ही सच्ची सफलता है।
संतोष मिश्रा की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी संदेश है कि यदि प्रत्येक शिक्षित युवा अपने पुराने विद्यालय और गाँव के लिए कुछ समय निकालकर अपने ज्ञान का योगदान दे, तो ग्रामीण शिक्षा की तस्वीर बदल सकती है और देश की नई पीढ़ी को बेहतर भविष्य की दिशा मिल सकती है।





