Ad imageAd image
d84ef9efc3d53b57ca3a957694261ad58b2c2b9e

कुदरी पंचायत में सामाजिक न्याय की जोरदार मांग, कैलाश अहिरवार ने छेड़ी बदलाव की मुहिम

admin
4 Min Read
इस खबर को शेयर करें

कुदरी पंचायत में सामाजिक न्याय की जोरदार मांग, कैलाश अहिरवार ने छेड़ी बदलाव की मुहिम

 

शहडोल।

जनपद पंचायत जयसिंहनगर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कुदरी में आगामी पंचायत चुनाव और परिसीमन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। लंबे समय से विकास और नेतृत्व में भागीदारी को लेकर उठ रही आवाज़ें अब एक संगठित आंदोलन का रूप लेती दिख रही हैं।

- Advertisement -
Ad imageAd image

 

ग्राम पंचायत कुदरी में अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के अधिकारों और प्रतिनिधित्व को लेकर युवा समाजसेवी कैलाश कुमार अहिरवार ने एक मजबूत जनजागरण अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकजुट होकर शहडोल कलेक्टर को आवेदन सौंपते हुए मांग की है कि आगामी पंचायत चुनाव में सरपंच पद को चक्रानुक्रम (Rotation) नियम के तहत अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित किया जाए।

25 वर्षों से एक ही वर्ग के पास नेतृत्व, रोटेशन नियम लागू करने की मांग

ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन में बताया गया है कि वर्ष 2000 से अब तक ग्राम पंचायत कुदरी में सरपंच पद लगातार अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित रहा है। इस दौरान अलग-अलग कार्यकालों में दलेल सिंह, मोती लाल सिंह, बिट्टी बाई और वर्तमान में चंद्रवती सिंह ने सरपंच पद का दायित्व संभाला है।

- Advertisement -
Ad imageAd image

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत की लगभग 50 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की होने के बावजूद उन्हें पिछले ढाई दशकों में नेतृत्व का अवसर नहीं मिला, जिससे सामाजिक संतुलन और विकास प्रभावित हुआ है। इसी कारण अब इस वर्ग में प्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।

विकास कार्यों पर उठे सवाल, बुनियादी सुविधाओं की कमी

युवा समाजसेवी कैलाश कुमार अहिरवार ने पंचायत की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि लंबे समय से एक ही प्रशासनिक ढांचे के कारण विकास कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है।

 

ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में आज भी कई मूलभूत समस्याएँ बनी हुई हैं—

सार्वजनिक सामुदायिक भवन का अभाव

कई मोहल्लों में पक्की पीसीसी सड़कों की कमी

ग्राम सभाओं में पारदर्शिता की कमी

विकास कार्यों की धीमी गति

इन समस्याओं के कारण ग्रामीणों को दैनिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

“हमारा उद्देश्य अधिकार दिलाना है, विरोध नहीं” — कैलाश अहिरवार

इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कैलाश कुमार अहिरवार ने स्पष्ट किया कि यह पहल किसी व्यवस्था के विरोध में नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने के लिए है।

उन्होंने कहा— “हमारा उद्देश्य किसी व्यवस्था का विरोध करना नहीं है, बल्कि हर वर्ग को उसका अधिकार दिलाना है। अनुसूचित जाति वर्ग के उत्थान और पंचायत में पारदर्शिता के लिए यह लड़ाई जारी रहेगी।”

उच्च स्तरीय जांच और आरक्षण की मांग:ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—

आगामी परिसीमन में सरपंच पद को अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित किया जाए।

पंचायत के पिछले वर्षों के विकास कार्यों और खर्चों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

बढ़ता समर्थन, जनआंदोलन का रूप

कुदरी पंचायत में शुरू हुई यह मुहिम अब तेजी से जनसमर्थन जुटा रही है। स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों का कहना है कि यह कदम सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और क्या कुदरी पंचायत में नेतृत्व परिवर्तन की यह आवाज़ आने वाले समय में वास्तविक बदलाव ला पाती है या नहीं।

Share This Article
Leave a Comment