कंचनपुर पंचायत में भ्रष्टाचार और आर्थिक गबन के आरोप, ईओडब्ल्यू से जांच की मांग
शहपुरा/डिंडौरी।
जनपद पंचायत शहपुरा अंतर्गत ग्राम पंचायत कंचनपुर माल में सरपंच, सचिव एवं उपयंत्री पर भ्रष्टाचार और आर्थिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) जबलपुर में शिकायत प्रस्तुत की गई है। शिकायतकर्ता विश्राम सिंह मरावी ने आरोप लगाया है कि पंचायत के विकास कार्यों में शासकीय राशि का दुरुपयोग करते हुए आर्थिक गबन किया गया है तथा जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
शिकायत के अनुसार ग्राम पंचायत कंचनपुर के सरपंच कृष्ण कुमार ओटिया, सचिव लक्ष्मी प्रसाद यादव एवं उपयंत्री विकास खरे के विरुद्ध 2 सितंबर 2025 को कलेक्टर डिंडौरी के समक्ष नौ बिंदुओं पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में पंचायत कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं, गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों तथा शासकीय राशि के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे।
तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर 17 सितंबर 2025 को तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था, जिसमें तहसीलदार शहपुरा, सहायक यंत्री बिलगांव नहर परियोजना तथा जिला पेंशन अधिकारी डिंडौरी को शामिल किया गया। जांच दल ने संबंधित कार्यस्थलों का भौतिक एवं तकनीकी निरीक्षण कर 23 सितंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पंचायत राज अधिनियम एवं शासन के नियमों के विपरीत सचिव के निजी खाते में 3,660 रुपये की राशि जमा पाई गई। शिकायत में इसे आर्थिक अपराध की श्रेणी का मामला बताया गया है।
इसके अलावा ग्राम सभा की बैठक नियमित रूप से नहीं किए जाने का मामला भी जांच में उजागर हुआ। जांच दल ने पाया कि 14 अप्रैल 2025 के बाद ग्राम सभा का आयोजन नहीं किया गया, जबकि नियमानुसार ग्राम सभा की बैठकें समय-समय पर आयोजित किया जाना अनिवार्य है।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर डिंडौरी द्वारा फरवरी 2026 में सरपंच और सचिव से स्पष्टीकरण मांगा गया था। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मामले को आवश्यक कार्रवाई हेतु जिला पंचायत एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भेजा गया, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
विश्राम सिंह मरावी ने शपथ पत्र के माध्यम से ईओडब्ल्यू जबलपुर को बताया है कि उनकी शिकायत तथ्यात्मक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है तथा मामला किसी न्यायालय में विचाराधीन नहीं है। उन्होंने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सभी की निगाहें ईओडब्ल्यू तथा जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।





