*जनगणना और भौतिक सत्यापन के नाम पर गरीबों का हक छीनने का प्रयास।।*
*जनगणना प्रभार मिलते ही अपने कर्तव्य से दूर भाग रहे जनगणना प्रभारी* ।
मामला कटनी जिले की रीठी तहसील का है जहां ग्रामीणों द्वारा सूचना प्राप्त हुई की जनगणना के प्रभारी के द्वारा जो घर-घर जनगणना करने जा रहे हैं उनके ऊपर दबाव बनाकर बिल्कुल ही गलत कार्य को अंजाम दिया जा रहा है मामला तब उजागर हुआ जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मिशन स्वच्छ भारत को लेकर कुछ खबरें सामने आए जिसमें जनगणना प्रभारी के द्वारा अपने कर्मचारियों यो के ऊपर दबाव बनाकर उनसे जानकारी जो की जनगणना के बाद पुनः सत्यापन के रूप में कराई जा रही है जिसमें शौचालय मैं पात्र एवं शौचालय में अपात्र लोगों का चयन करना है ।लेकिन उच्च अधिकारियों के द्वारा जिनके पास वास्तव में शौचालय नहीं है और ना ही आज दिनांक तक स्वच्छ मिशन के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस मिशन से जुड़े कोई भी कार्य का लाभ नहीं लिया जिनके पास आज दिनांक तक शौचालय उपलब्ध नहीं है लेकिन निंदनीय बात यह है कि उच्च अधिकारियों के द्वारा अपने निम्न कर्मचारी जो जनगणना में घर-घर जाकर जनगणना का काम इस तपतपाती धूप में सुचारू रूप से कर रहे उनके ऊपर दबाव बनाया जा रहा है कि आप जो अपात्र है उन्हें भी पात्र बनाए अब सोचनीय बात यह है कि जो वास्तव में लाभ लेने से वंचित है और उनको कोई लाभ भी नहीं मिला उसका क्या होगा क्या अधिकारियों को जरा भी इसका ध्यान नहीं है अपने चंद कार्य को पूरा करने के चक्कर में ये भूल गए कि उस गरीब पर क्या बीतेगी और उसे कभी लाभ न मिलेगा अपनी प्रतिष्ठा पाने के चक्कर में दूसरे के हितों से खेलना कौन सा न्याय है आखिर ऐसे अधिकारियों के ऊपर क्यों कुछ कदम नहीं उठाए जाते ।कब तक इनका ये रवैया रहेगा। रीठी तहसील के अंतर्गत ऐसे कई परिवार है जिसकी जांच हो तो सच सामने आ जाएगा जो सर्वे में पात्र बताया गया हैं वह वास्तव में अपात्र ही निकलेगा न ही आज तक उन्हें कोई लाभ मिला ।




