प्रेस नोट 10/04/2026
*केन बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावितो का आंदोलन उग्र -*
*पन्ना-छतरपुर में ‘चिता आंदोलन’ से हड़कंप: न्याय दो या मौत दो के नारों के बीच जल-जंगल-जमीन का महासंग्राम*
*छतरपुर/पन्ना:*
केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ चल रहा जन-आंदोलन अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को झकझोर कर रख दिया है। प्रशासन द्वारा लगाई गई धारा 163 और कड़े पहरे के बीच, हजारों आदिवासियों, किसानों और महिलाओं ने केन नदी की जलधारा के बीचों-बीच ‘प्रतीकात्मक चिताओं’ पर लेटकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। बच्चों को गोद में लिए चिताओं पर लेटी इन महिलाओं का एक ही स्वर है— “न्याय दो या मौत दो।”
*नदी के बीचों-बीच अनोखा प्रतिरोध*
प्रशासन ने पन्ना और छतरपुर की सीमाओं को सील कर बाहरी आवाजाही पर रोक लगा दी थी। इसके जवाब में आंदोलनकारियों ने केन नदी को अपना ठिकाना बनाया, जो दोनों जिलों की सीमा साझा करती है। पन्ना के किसान अपनी सीमा में और छतरपुर के किसान अपनी सीमा में रहते हुए संयुक्त रूप से आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जय किसान संगठन के अमित भटनागर ने इसे ‘दमन के विरुद्ध लोकतन्त्र की जीत’ बताया है।
*दमन और संघर्ष की दास्तां*
*आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं:*
*आपूर्ति पर रोक:* आरोप है कि आंदोलन स्थल तक पहुँचने वाले राशन, पानी और आवश्यक वस्तुओं को पुलिस और वन विभाग द्वारा रोका जा रहा है।
*धमकियाँ और दबाव:* स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों को आंदोलनकारियों की मदद न करने के लिए डराया-धमकाया जा रहा है।
*झड़प की स्थिति:* आंदोलन को खत्म कराने की कोशिश के दौरान महिलाओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसमें महिलाओं के आक्रोश को देख प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े।
“यह लड़ाई सिर्फ मुआवजे की नहीं है। यह हमारे जल, जंगल, जमीन और संस्कृति को बचाने की लड़ाई है। जितना दमन होगा, संघर्ष उतना ही तेज होगा।”
*— अमित भटनागर, नेतृत्वकर्ता*
*प्रशासन (कलेक्टर पार्थ जैसवाल)-* 90% ग्रामीणों को मुआवजा दिया जा चुका है। प्रदर्शनकारियों की मांगें अवैधानिक हैं। धारा 163 के उल्लंघन पर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
*आंदोलनकारी (अमित भटनागर)-* क्या कानून (धारा 11,15,18, 19, 21) का पालन मांगना अवैधानिक है? अगर आपने इन कानूनों का 10 प्रतिशत भी पालन किया हो तो में आंदोलन से खुद हट जाऊंगा,अगर ग्राम सभा हुई है तो उसके दस्तावेज सार्वजनिक करें। फर्जी आश्वासनों से आंदोलन नहीं रुकेगा।
आपने डॉ. के आने पर रोक लगा दी यहां पर आंदोलनकारियो के स्वास्थ बिगड़ रहे हैं और इस तरह से दमनात्मक कार्यवाही शर्मनाक है,
*निर्णायक मोड़ पर आंदोलन-*
तीसरे दिन भी ‘चिता आंदोलन’ जारी रहा और आदिवासियों ने वहीं झोपड़ियाँ बनाकर अनिश्चितकालीन डेरा डाल दिया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन, पुलिस और सत्ता के गठजोड़ ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है और ग्रामीणों का शोषण किया है।
यह दृश्य अत्यंत मार्मिक है जहाँ छोटे-छोटे बच्चे अपनी माताओं के साथ चिताओं पर लेटे हैं। यह घटनाक्रम अब केवल एक स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बन गया है।
*मीडिया सेल*
*जय किसान संगठन*


