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फरीदकोट पुलिस ने की 32 गाड़ियों की खुली नीलामी, सरकारी खजाने में जमा हुए ₹6.25 लाख; पुलिस थानों और पुलिस लाइन में खाली हुई जगह का होगा सही इस्तेमाल: एसएसपी गुरबंस सिंह बैंस

Alexander D’Souza
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फरीदकोट पुलिस ने की 32 गाड़ियों की खुली नीलामी, सरकारी खजाने में जमा हुए ₹6.25 लाख; पुलिस थानों और पुलिस लाइन में खाली हुई जगह का होगा सही इस्तेमाल: एसएसपी गुरबंस सिंह बैंस 

-नीलाम की गई गाड़ियों में 12 चौपहिया और 20 दोपहिया वाहन शामिल थे: डीएसपी नवीन कुमार
फरीदकोट, 14 जुलाई (अलेक्जेंडर डिसूजा):
प्रशासनिक पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए फरीदकोट जिला पुलिस ने पुलिस लाइन में विभिन्न मामलों से जुड़ी 32 गाड़ियों की खुली नीलामी की। इस सफल नीलामी प्रक्रिया से सरकारी खजाने में कुल 6 लाख 25 हजार रुपये का राजस्व जमा हुआ है।
इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए फरीदकोट के एसएसपी श्री गुरबंस सिंह बैंस ने बताया कि यह नीलामी पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत गाड़ी डिस्पोजल कमेटी के सदस्यों की गरिमामयी मौजूदगी में संपन्न कराई गई है। उन्होंने कहा कि गाड़ियों की नीलामी होने से पुलिस थानों और पुलिस लाइन में लंबे समय से घेरी गई जगह अब खाली हो जाएगी, जिसका इस्तेमाल भविष्य में पुलिसिंग और अन्य जरूरी सरकारी कार्यों के लिए सही तरीके से किया जा सकेगा।
नीलामी में बिकी गाड़ियों का पूरा ब्योरा:
डीएसपी (लोकल) फरीदकोट श्री नवीन कुमार ने बताया कि इस खुली नीलामी में हिस्सा लेने के लिए करीब 37 बोलीदाता (bidders) पहुंचे थे।
नीलाम की गई कुल 32 गाड़ियों का विवरण इस प्रकार है:-
गाड़ियों के प्रकार: नीलामी में 12 चौपहिया (फोर-व्हीलर) और 20 दोपहिया (मोटरसाइकिल) वाहन शामिल थे।
मामलों का विवरण: ये गाड़ियां सदर कोटकपूरा के 31 अलग-अलग मामलों से जुड़ी थीं। इनमें से 08 गाड़ियां एनडीपीएस (NDPS – ड्रग ट्रैफिकिंग) एक्ट के तहत और 24 गाड़ियां अन्य विभिन्न मामलों से संबंधित थीं।
खराब हो चुकी थीं गाड़ियां: इन वाहनों में बड़ी संख्या में वे मोटरसाइकिलें थीं जिन्हें पुलिस ने ज़ब्त किया था। इन्हें वापस लेने के लिए किसी भी पक्ष ने कोई कानूनी कदम नहीं उठाया, जिससे लंबे समय तक थानों में खड़े-खड़े इनकी हालत बेहद जर्जर और कबाड़ हो चुकी थी।
कोर्ट के फैसले के बाद भी कोई दावेदार नहीं आया
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इन गाड़ियों से जुड़े अदालती मामलों के फैसले काफी पहले आ चुके थे। इसके बावजूद, लंबा समय बीत जाने पर भी किसी भी व्यक्ति ने इन पर अपना मालिकाना हक या दावा पेश नहीं किया। नीलामी के दौरान जिन गाड़ियों के कागज़ात उपलब्ध नहीं थे और जो दोबारा सड़क पर चलने लायक नहीं बची थीं, उन्हें खुली बोली के जरिए कबाड़ (Scrap) के रूप में बेच दिया गया।
पहले भी हो चुकी है बड़ी नीलामी, आगे भी जारी रहेगा अभियान:
एसएसपी श्री गुरबंस सिंह बैंस ने आगे बताया कि इससे पहले भी इसी साल अप्रैल और मई के महीनों में पुलिस विभाग द्वारा 284 गाड़ियों की सफल नीलामी की जा चुकी है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि थानों में खड़ी अन्य गाड़ियों का रिकॉर्ड भी तेजी से तैयार किया जा रहा है और जल्द ही उनकी भी नीलामी की जाएगी, ताकि पुलिस थानों के परिसर को साफ-सुथरा कर उनका लुक बदला जा सके।
न्यूज़: 14-1
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