नौरोजाबाद में ईद-उल-अजहा की रौनक, अकीदत और भाईचारे का दिखा अद्भुत नज़ारा
उमरिया से फैज मोहम्मद की खास रिपोर्ट
नौरोजाबाद में गुरुवार, 28 मई को ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व पूरे धार्मिक उल्लास, अकीदत और भाईचारे के साथ मनाया गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही मुस्लिम समुदाय के लोग नए और पारंपरिक परिधानों में सजकर ईदगाह और कब्रिस्तानों की ओर रवाना हुए, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने विशेष नमाज अदा की। नमाज के बाद हर तरफ “ईद मुबारक” की गूंज सुनाई दी और लोगों ने गले मिलकर मोहब्बत, अमन और सौहार्द का पैगाम दिया।
ईदगाहों में मौलानाओं ने अपने तकरीर में बकरीद के महत्व को बताते हुए कहा कि यह त्योहार हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की अल्लाह के प्रति बेपनाह मोहब्बत, कुर्बानी और समर्पण की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि बकरीद हमें त्याग, इंसानियत, दया और जरूरतमंदों की मदद करने की सीख देती है।

इस मुबारक मौके पर लोगों ने अपनी हैसियत के अनुसार कुर्बानी की रस्म अदा की और इस्लामी परंपरा के मुताबिक गोश्त को तीन हिस्सों में बांटकर परिवार, रिश्तेदारों और गरीब-जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया। इस खूबसूरत परंपरा ने समाज में बराबरी, भाईचारे और इंसानियत की मिसाल पेश की।
त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए नौरोजाबाद प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। ईदगाहों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल ने लगातार निगरानी रखकर शांति व्यवस्था बनाए रखी।
नमाज के बाद घरों में सेवइयां, बिरयानी और कई पारंपरिक व्यंजन तैयार किए गए। लोगों ने रिश्तेदारों और दोस्तों के घर पहुंचकर खुशियां बांटी और बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। पूरा नगर ईद की खुशियों और भाईचारे के रंग में रंगा नजर आया।
नौरोजाबाद में मनाई गई बकरीद ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि त्योहार केवल खुशियां मनाने का नाम नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, इंसानियत और सामाजिक एकता को मजबूत करने का माध्यम भी हैं।





