पंजाब के नर्सिंग छात्रों की विदेश में ‘डायरेक्ट एंट्री’: -बाबा फरीद यूनिवर्सिटी का ऐतिहासिक कदम, 
-बिना IELTS जर्मनी जाने का रास्ता साफ;
-हब एंड स्पोक’ मॉडल से युवाओं को मिलेगा ग्लोबल प्लेटफॉर्म—-
फरीदकोट (अलेक्जेंडर डिसूजा): पंजाब के नर्सिंग और हेल्थकेयर सेक्टर में एक नए स्वर्णिम युग की शुरुआत हुई है। बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (BFUHS) के वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) राजीव सूद की दूरदर्शी पहल ने राज्य के छात्रों के लिए ‘ग्लोबल हेल्थकेयर कॉरिडोर’ का रास्ता खोल दिया है। इस नई योजना के तहत पंजाब के युवा अब बिचौलियों के चंगुल से बचकर सीधे यूरोप के अस्पतालों में अपनी सेवाएँ दे सकेंगे।
क्या है “हब एंड स्पोक” मॉडल?
यूनिवर्सिटी इस पूरे प्रोजेक्ट के मुख्य ‘हब’ (केंद्र) के रूप में कार्य करेगी, जबकि राज्य के अन्य नर्सिंग कॉलेज ‘स्पोक’ के तौर पर इससे जुड़ेंगे। इसके माध्यम से
छात्रों को अंतरराष्ट्रीय मानकों की ट्रेनिंग दी जाएगी।
UK और जर्मनी जैसे देशों की स्वास्थ्य प्रणालियों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।
प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और कानूनी बनाया जाएगा।
जर्मनी: अब न IELTS का डर, न उम्र की बंदिश,
इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता जर्मनी जाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए है।
IELTS की जरूरत नहीं: अब जर्मनी जाने के लिए कठिन अंग्रेजी परीक्षा (IELTS) अनिवार्य नहीं होगी।
उम्र सीमा में छूट: 45 साल तक के प्रोफेशनल्स भी इस प्रोग्राम का हिस्सा बनकर ग्लोबल करियर बना सकते हैं।
जर्मन भाषा ट्रेनिंग: छात्रों को विशेष रूप से जर्मन भाषा सिखाई जाएगी ताकि वे वहां के माहौल में आसानी से ढल सकें।
एजेंटों से मुक्ति: डॉ. सूद के अनुसार, इसका मुख्य उद्देश्य अवैध एजेंटों द्वारा किए जाने वाले शोषण को खत्म करना है।
“हमारा लक्ष्य पंजाब के युवाओं को एक सुरक्षित और कानूनी मार्ग प्रदान करना है ताकि वे बिना किसी डर के वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा दिखा सकें—-डॉ. राजीव सूद, कुलपति, BFUHS
विशेषज्ञों की राय और आर्थिक सहयोग:
यूनिवर्सिटी में आयोजित विशेष सत्र में ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर मिस अल्बा स्मेरिग्लियो ने बताया कि 2030 तक यूरोप में लगभग 40 लाख हेल्थकेयर वर्कर्स की जरूरत होगी। वहीं, पंजाब एंड सिंध बैंक के FGM करमजीत सिंह ने छात्रों के लिए विशेष ‘स्किल लोन’ की घोषणा की, ताकि आर्थिक तंगी किसी के सपनों में बाधा न बने।
इस अवसर पर ‘ऑक्सिला एकेडमी’ के विशेषज्ञों ने जर्मन वर्क-कल्चर की बारीकियां समझाईं। कार्यक्रम के अंत में प्रिंसिपल डॉ. जसबीर कौर ने सभी का धन्यवाद करते हुए इसे पंजाब के भविष्य के लिए एक मील का पत्थर बताया।
न्यूज़: 24-3,
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