“कुपोषण मिटाने की योजना पर पलीता: पाली के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को नहीं मिल रहा मीनू के अनुसार भोजन”
उमरिया |( पत्रकार विपिन शिवहरे की कलम से..!)
उमरिया जिले के पाली क्षेत्र में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। सरकार द्वारा बच्चों में कुपोषण खत्म करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं की हालत बेहद खराब दिखाई दे रही है।
जानकारी के अनुसार उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली जनपद पंचायत क्षेत्र के शहरी और ग्रामीण इलाकों में संचालित कई आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को शासन द्वारा निर्धारित मीनू के अनुसार नाश्ता और भोजन नहीं मिल रहा है। इससे सरकार की कुपोषण मुक्त भारत की योजना पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधिकारियों और समूह माफिया की जुगलबंदी का आरोप:
ग्रामीणों का आरोप है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के कुछ अधिकारियों और स्वयं सहायता समूहों की मिलीभगत से आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण आहार और नाश्ते की व्यवस्था में गड़बड़ी हो रही है। शासन द्वारा बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़ी राशि खर्च की जा रही है, लेकिन केंद्रों में आने वाले नौनिहालों तक उसका पूरा लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।
बताया जा रहा है कि कई केंद्रों में न तो तय मीनू के अनुसार नाश्ता दिया जा रहा है और न ही भोजन की गुणवत्ता ठीक है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर सीधा असर पड़ रहा है।
मीनू के अनुसार नहीं मिल रहा नाश्ता और भोजन:
स्थानीय लोगों के अनुसार कई आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को सुबह का नाश्ता समय पर नहीं दिया जाता। कभी-कभार केवल दलिया भेज दिया जाता है, जिसे बच्चे स्वादहीन होने के कारण खाना पसंद नहीं करते।
वहीं मध्यान्ह भोजन के नाम पर केवल नाममात्र की रोटी और पतली दाल परोस दी जाती है। बच्चों की संख्या अधिक होने के बावजूद कई जगह केवल 7 से 8 रोटियां बनाकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है। इससे कई बच्चों को पर्याप्त भोजन भी नहीं मिल पाता।
तय समय पर नहीं खुलते आंगनवाड़ी केंद्र:
शासन द्वारा एक मार्च से आंगनवाड़ी केंद्रों का समय सुबह 9 बजे से निर्धारित किया गया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कई केंद्र 10 या 11 बजे खुलते हैं। वहीं नियम के अनुसार शाम 3 बजे तक खुला रहने वाला केंद्र कई जगह दोपहर 1 बजे ही बंद कर दिया जाता है।
कुछ स्थानों पर तो कार्यकर्ता और सहायिका भी केंद्र में मौजूद नहीं रहतीं, जिससे बच्चे परिसर के आसपास कूड़े-कचरे के बीच खेलते नजर आते हैं।
शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई:
ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी कई बार आंगनवाड़ी केंद्रों की शिकायत की गई, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी और सुपरवाइजर द्वारा नियमित निरीक्षण भी नहीं किया जाता।
कुपोषण मुक्त अभियान पर उठ रहे सवाल:
सरकार एक ओर कुपोषण को खत्म करने के लिए लगातार अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर आंगनवाड़ी केंद्रों की बदहाल स्थिति इन प्रयासों को कमजोर करती नजर आ रही है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आंगनवाड़ी केंद्रों की नियमित जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि बच्चों को उनका हक और पोषण मिल सके।
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