अनूपपुर के पूर्व विधायक रामलाल रौतेल को मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग का अध्यक्ष नियुक्त, शुभकामनाओं का सिलसिला जारी
भोपाल, 23 अप्रैल 2026 —
मध्यप्रदेश शासन, जनजातीय कार्य विभाग द्वारा राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग का पुनर्गठन करते हुए अनूपपुर विधानसभा के पूर्व विधायक रामलाल रौतेल को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से प्रभावी रहेगी।
मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग अधिनियम, 1995 की धारा-3 की उपधारा (2) के तहत जारी आदेश के अनुसार भगत नेताम एवं मंगल सिंह धुर्वे को आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया है।
यह आदेश राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार जारी किया गया है। आदेश पर अवर सचिव आर.एस. वर्मा द्वारा 23 अप्रैल 2026 को डिजिटल हस्ताक्षर किए गए।

नियुक्ति पर शुभकामनाओं की बौछार:
रामलाल रौतेल को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में शुभकामनाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। समर्थकों एवं नागरिकों द्वारा सोशल मीडिया पर बधाई संदेशों की भरमार देखी जा रही है।
लोगों ने पोस्ट कर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि “अनूपपुर विधानसभा के पूर्व विधायक आदरणीय रामलाल रौतेल जी भाई साहब को अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष बनने पर बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ। प्रभु श्री जी का आशीर्वाद सदैव बना रहे।”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार बधाई संदेश साझा किए जा रहे हैं, जिसमें समर्थक उनके नए दायित्व को लेकर उज्ज्वल कार्यकाल की कामना कर रहे हैं।
संबंधित उपयोगी जानकारी:
मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष का दायित्व आयोग के समग्र कार्यों का नेतृत्व और मार्गदर्शन करना होता है। यह पद मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति आयोग अधिनियम, 1995 के प्रावधानों तथा आयोग को प्राप्त वैधानिक शक्तियों के अंतर्गत संचालित होता है। अध्यक्ष का मुख्य कार्य आयोग की बैठकों की अध्यक्षता करना, जनजातीय अधिकारों से जुड़ी शिकायतों और मामलों की प्राथमिकता तय करना, जांच प्रक्रियाओं की निगरानी करना तथा राज्य सरकार को प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट और सिफारिशों को अंतिम रूप देना होता है। इसके साथ ही अध्यक्ष यह सुनिश्चित करता है कि अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण हो, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जमीनी स्तर तक पहुंचे और किसी भी प्रकार के शोषण या भेदभाव पर समयबद्ध कार्रवाई की जाए। अध्यक्ष आयोग और सरकार के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हुए नीति निर्माण, समीक्षा और सुधार संबंधी सुझावों में निर्णायक भूमिका निभाता है, जिससे जनजातीय समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास को गति मिल सके।





