ब्यौहारी नगर परिषद की बड़ी लापरवाही: हजारों डस्टबिन परिसर में पड़े-पड़े हो रहे खराब, लाखों रुपये की खरीदी पर उठे गंभीर सवाल
घरों तक नहीं पहुंचे कचरा पात्र, अधिकारी की उदासीनता से सरकारी धन का हो रहा दुरुपयोग
*विनय द्विवेदी ब्यौहारी* – नगर परिषद ब्यौहारी में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर को स्वच्छ और सुंदर बनाने तथा प्रत्येक घर तक कचरा प्रबंधन की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से खरीदे गए हजारों डस्टबिन आज भी आम लोगों के उपयोग में नहीं आ सके हैं। खरीदी के कई महीने बीत जाने के बाद भी इनका वितरण नहीं किया गया है।
जानकारी के अनुसार, नगर परिषद द्वारा खरीदे गए डस्टबिन मऊ स्थित वाटर प्लांट परिसर में खुले आसमान के नीचे पड़े हुए हैं। तेज धूप, बारिश और धूल के कारण इन डस्टबिनों की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। यदि समय रहते इनका उपयोग नहीं किया गया तो सरकारी धन से खरीदी गई सामग्री खराब होने का खतरा भी बढ़ जाएगा।

वहीं दूसरी ओर नगर के अधिकांश वार्डों में लोग आज भी कचरा रखने के लिए डस्टबिन की सुविधा से वंचित हैं। मजबूरी में लोग सड़कों, नालियों, खाली प्लॉटों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंक रहे हैं, जिससे गंदगी फैल रही है। कई स्थानों पर कचरे के ढेर लगने से दुर्गंध फैल रही है और मच्छर-मक्खियों के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर परिषद ने डस्टबिन खरीदने के लिए लाखों रुपये खर्च किए थे, तो उनका उद्देश्य आम जनता को सुविधा देना होना चाहिए था। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता के कारण यह पूरी योजना कागजों तक सीमित होकर रह गई है। लोगों का आरोप है कि खरीदी तो कर ली गई, लेकिन वितरण की कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई।
नगरवासियों का यह भी कहना है कि सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगरों की स्वच्छता सुधारने और स्वच्छता रैंकिंग बेहतर बनाने के लिए लगातार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में असफल साबित हो रहे हैं। यदि समय पर डस्टबिनों का वितरण किया गया होता तो नगर की स्वच्छता व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलता।
इस पूरे मामले में नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर लाखों रुपये की सामग्री खरीदने के बाद उसे महीनों तक गोदाम या परिसर में क्यों रखा गया? वितरण में देरी का जिम्मेदार कौन है? क्या इस लापरवाही के लिए किसी अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी? ऐसे कई सवाल अब नगरवासियों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
नगर के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने तथा डस्टबिनों का शीघ्र वितरण सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बन जाएगा।





