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कागजों में छलकी ‘जल क्रांति’, नौरोजाबाद में सूखी पड़ी उम्मीदों की टंकी

admin
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कागजों में बह रही ‘नल-जल’ की गंगा, हकीकत में बूंद-बूंद को तरस रहे नौरोजाबाद के लोग

 

आठ महीने से अधूरी पड़ी पानी टंकी, विभागीय लापरवाही और ठेकेदार की मनमानी से बढ़ा जल संकट

 

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उमरिया | फैज मोहम्मद की रिपोर्ट

 

सरकार भले ही हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए करोड़ों-अरबों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन उमरिया जिले के नौरोजाबाद नगर परिषद क्षेत्र में नल-जल योजना की जमीनी हकीकत सरकारी दावों की पोल खोल रही है। यहां वार्डों में जल निकासी की अव्यवस्था से गंदगी का आलम है, लेकिन पीने के पानी के लिए लोग दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

 

नगर परिषद नौरोजाबाद में लाखों-करोड़ों रुपये की लागत से बनाई जा रही पानी की टंकी निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी अधूरी पड़ी है। नतीजा यह है कि भीषण गर्मी में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं, जबकि विभागीय अधिकारी और निर्माण एजेंसी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर मामले से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।

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दो दिन काम, फिर महीनों सन्नाटा

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि राघोपुर क्षेत्र में बन रही पानी टंकी का निर्माण कार्य पिछले आठ महीनों से बेहद धीमी गति से चल रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक मजदूर दो दिन काम करते हैं और फिर कई हफ्तों तक निर्माण स्थल पर सन्नाटा पसरा रहता है।

 

लोगों का कहना है कि यदि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग समय रहते ठेकेदार पर कार्रवाई करता, तो आज टंकी बनकर तैयार हो चुकी होती और लोगों के घरों तक पानी पहुंच रहा होता। लेकिन विभागीय उदासीनता और ठेकेदार की लापरवाही ने पूरी योजना को अधर में लटका दिया है।

 


फाइलों में सफल योजना, जमीन पर सूखी टोटियां

सबसे हैरानी की बात यह है कि सरकारी फाइलों और समीक्षा बैठकों में नल-जल योजना को सफल और संचालित बताया जा रहा है। कागजों में गांवों तक पानी पहुंच चुका है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट दिखाई देती है।

 

गर्मी बढ़ने के साथ ही जल संकट भयावह रूप ले चुका है। क्षेत्र में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। अधिकांश कुएं सूख चुके हैं और हैंडपंपों ने भी जवाब देना शुरू कर दिया है। प्राकृतिक जल स्रोत खत्म होने के बाद ग्रामीणों की उम्मीद इसी पानी टंकी पर टिकी थी, लेकिन वह भी अधूरी खड़ी है।

 


पानी के लिए मीलों भटक रहे ग्रामीण

नौरोजाबाद और आसपास के वार्डों में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सिर पर बाल्टियां और बर्तन रखकर पानी की तलाश में रोज कई किलोमीटर तक भटक रहे हैं। सुबह होते ही लोगों की निगाहें अधूरी पड़ी पानी टंकी पर टिक जाती हैं कि शायद आज काम शुरू हो जाए, लेकिन हर दिन उन्हें निराशा ही हाथ लगती है।

ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता और अधिकारियों ने अब इस संकट की ओर से आंखें मूंद ली हैं। जल संकट का पूरा भार आम जनता पर आ पड़ा है।

 

ग्रामीणों की चेतावनी – जल्द शुरू हो काम, नहीं तो होगा आंदोलन

लगातार बढ़ती परेशानी के बीच अब ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। लोगों ने जिला प्रशासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू कर पानी टंकी चालू नहीं कराई गई, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, लापरवाह ठेकेदार का अनुबंध निरस्त किया जाए और उसे काली सूची में डाला जाए। साथ ही क्षेत्र की जनता को इस भीषण जल संकट से तत्काल राहत दिलाई जाए।

जनता का सवाल – आखिर कब बहेगा नलों में पानी?

नौरोजाबाद के लोग अब यही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना का लाभ उन्हें कब मिलेगा? करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि लोगों को पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा, तो जिम्मेदारी किसकी है?

अब देखना यह होगा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग इस गंभीर संकट पर कब जागता है या फिर नौरोजाबाद की जनता यूं ही प्यास और परेशानियों से जूझती रहेगी।

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