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समय की सुई बता रही है सच्चाई — बचपन पर भारी पड़ रही मजदूरी

admin
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समय की सुई बता रही है सच्चाई — बचपन पर भारी पड़ रही मजदूरी

 

ब्यौहारी, मध्य प्रदेश | विशेष रिपोर्ट

 

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शहडोल जिले के ब्यौहारी नगर में बाल श्रम की समस्या लगातार गहराती जा रही है। नगर के विभिन्न हिस्सों में नाबालिग बच्चों से दुकानों, चाय स्टॉल, होटलों और छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों में काम कराया जा रहा है। मामूली मजदूरी के बदले इन बच्चों से पूरे दिन काम लिया जाता है, जिससे उनका बचपन, शिक्षा और भविष्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। यह स्थिति न केवल सामाजिक चिंता का विषय है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है।

सुबह 7 बजे: स्कूल की घंटी बनाम दुकान की पुकार

सुबह के समय जब बच्चों को स्कूल जाने की तैयारी करनी चाहिए, उस समय ब्यौहारी के कई बच्चे काम पर निकल जाते हैं। रेलवे तिराहा स्थित मनोहर चाय दुकान का मामला इसका ताजा उदाहरण है, जहां एक नाबालिग बालक ग्राहकों तक चाय पहुंचाते हुए देखा गया। स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थिति केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर के कई हिस्सों में इसी तरह के दृश्य आम हैं।

दोपहर 1 बजे: किताबों की जगह काम का दबाव

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दोपहर के समय, जब स्कूलों में पढ़ाई अपने चरम पर होती है, तब ये बच्चे दुकानों और होटलों में काम करते नजर आते हैं। शिक्षा से दूर होते जा रहे ये बच्चे धीरे-धीरे श्रम के दायरे में फंसते जा रहे हैं। कई मामलों में आर्थिक मजबूरी इसका कारण बनती है, लेकिन इसका खामियाजा बच्चों के भविष्य को भुगतना पड़ता है।

शाम 6 बजे: थकान से भरा बचपन

दिनभर काम करने के बाद ये बच्चे शारीरिक और मानसिक रूप से थक जाते हैं। न तो उन्हें खेलने का समय मिल पाता है और न ही पढ़ाई का। बचपन, जो खुशियों और सीखने का समय होना चाहिए, वह जिम्मेदारियों के बोझ तले दबता जा रहा है।

कानून क्या कहता है?

बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का व्यवसायिक कार्य कराना अपराध है। इसके बावजूद ब्यौहारी नगर में इस कानून का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है, जो प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।

 

प्रशासन पर उठते सवाल

महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग और स्थानीय पुलिस की जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों की पहचान कर कार्रवाई करें। लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि निगरानी और कार्रवाई दोनों में कमी है। यह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

स्थानीय लोगों की आवाज

नगरवासियों का कहना है कि प्रशासन केवल औपचारिकताओं तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई करे। बाल श्रम कराने वाले दुकानदारों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाए जाएं, ताकि इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।

बड़ा सवाल।

जब नगर में खुलेआम नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराई जा रही है, तो जिम्मेदार विभाग आखिर क्या कर रहे हैं? यह सवाल अब आम नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।

यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कई बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाएगा। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन, समाज और परिवार मिलकर इस समस्या के समाधान के लिए गंभीर प्रयास करें, ताकि हर बच्चे को शिक्षा और सुरक्षित बचपन मिल सके।

 

 

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