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मोबाइल फोन का बेवजह इस्तेमाल पूरे समाज के लिए गंभीर खतरे का संकेत: श्री कृष्ण आर.ए. -गाड़ी चलाते समय फोन का इस्तेमाल बन रहा हादसों का सबब; माता-पिता से बच्चों को इस दलदल से बचाने की अपील…

Alexander D’Souza
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मोबाइल फोन का बेवजह इस्तेमाल पूरे समाज के लिए गंभीर खतरे का संकेत: श्री कृष्ण आर.ए.
-गाड़ी चलाते समय फोन का इस्तेमाल बन रहा हादसों का सबब; माता-पिता से बच्चों को इस दलदल से बचाने की अपील… 

फरीदकोट, 19 जून (अलेक्जेंडर डिसूजा): आज के दौर में विज्ञान और तकनीक (Science & Technology) की तरक्की अपने चरम पर है, जिसके परिणाम स्वरूप सोशल मीडिया और डिजिटल उपकरणों का चलन अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है। वर्तमान समय में सोशल मीडिया, मोबाइल फोन और कंप्यूटर इंसानी जिंदगी का अपरिहार्य हिस्सा बन चुके हैं। बच्चे हों या बुजुर्ग, हर कोई मोबाइल स्क्रीन से चिपका नजर आता है। स्थिति यह है कि अगर आप अपने आस-पास नजर दौड़ाएंगे, तो करीब 95 से 96 फीसदी लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए दिखाई देंगे।

पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के सेवानिवृत्त (Retired) अधिकारी और लॉर्ड बुद्धा चैरिटेबल ट्रस्ट (LBCT) के मुख्य सलाहकार श्री कृष्ण आर.ए. ने समाज में मोबाइल फोन की इस लत को एक गंभीर खतरे का संकेत बताया है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय रहते इस लत पर काबू नहीं पाया गया, तो यह पूरे समाज के लिए जानलेवा साबित होगी। उन्होंने आम जनता से मोबाइल फोन का अनुशासित और सही तरीके से इस्तेमाल करने की पुरजोर अपील की है।
मोबाइल फोन के बढ़ते दुरुपयोग से उत्पन्न मुख्य समस्याएं:
श्री कृष्ण आर.ए. ने मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाले नुकसानों को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में रेखांकित किया है:-
जानलेवा दुर्घटनाएं: कई लोग वाहन चलाते समय भी मोबाइल फोन पर व्यस्त रहते हैं, जो ध्यान भटकाने और गंभीर सड़क हादसों का मुख्य कारण बनता है। ऐसे लोग न सिर्फ अपनी बल्कि दूसरों की जान भी जोखिम में डालते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर: मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग व्यक्ति को मानसिक तनाव (Stress) की ओर धकेलता है। ऐसा व्यक्ति धीरे-धीरे चिड़चिड़ेपन, अवसाद और व्यवहारिक बदलावों का शिकार हो जाता है।
शारीरिक बीमारियां: इसके बेवजह इस्तेमाल से न केवल कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की रोशनी कमजोर हो रही है, और फोन चलाते समय गर्दन झुकाए रखने से ‘सर्वाइकल’ जैसी बीमारियां अब आम हो चुकी हैं।
रिश्तों में बढ़ती दूरियां: मोबाइल का आदी इंसान अपनों के बीच रहकर भी अकेला हो जाता है। वह आभासी (Virtual) दुनिया में इतना खो जाता है कि उसे वास्तविक रिश्तों और सामाजिक ताने-बाने से कोई सरोकार नहीं रह जाता।
देश के भविष्य को बचाने की अपील
“मैं सभी माता-पिता से विशेष अनुरोध करता हूं कि वे अपने बच्चों को मोबाइल फोन की इस बुरी लत से बचाएं। बच्चों को इस दलदल से बाहर निकालकर ही हम देश के भविष्य को सुरक्षित और उज्ज्वल बना सकते हैं”: श्री कृष्ण आर.ए. (चीफ एडवाइजर, LBCT)
न्यूज़: 19-4
फोटो कैप्शन: समाज को जागरूक करते लॉर्ड बुद्धा चैरिटेबल ट्रस्ट के मुख्य सलाहकार श्री कृष्ण आर.ए.।

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