“कागज़ों पर विकास, ज़मीन पर तबाही” — नौरोजाबाद में वार्ड 1 और 3 की सड़कें बनीं भ्रष्टाचार की जीवंत मिसाल, जनता ने उठाई उच्च स्तरीय जांच की मांग
उमरिया (म.प्र.) | विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
रिपोर्ट: फैज मोहम्मद
नौरोजाबाद नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 1 और 3 में हाल ही में बनाई गई सड़कों ने विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माण के कुछ ही दिनों के भीतर इन सड़कों का उखड़ना, टूटना और बिखरना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि पूरे निर्माण तंत्र की पारदर्शिता पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी ये सड़कें आज चलने योग्य स्थिति में नहीं हैं और हालात ऐसे हैं जैसे निर्माण कार्य “कागज़ों पर मजबूत और जमीन पर कमजोर” साबित हुआ हो।
“एक्सपायरी से पहले ही दम तोड़ती सड़कें” — गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
वार्डवासियों का आरोप है कि सड़क निर्माण में तय मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। डामर की मात्रा में कटौती और घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण सड़कें बनने के तुरंत बाद ही टूटने लगीं।
लोगों का कहना है कि सड़कें इतनी कमजोर हैं कि पहली ही बारिश या सामान्य यातायात का दबाव भी झेलने में असमर्थ साबित हो रही हैं।
“जिस रास्ते से रोज गुजरते हैं जिम्मेदार, वहीं सबसे ज्यादा अनदेखी”
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि यह वही मुख्य मार्ग है, जहां से नगर पालिका के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी नियमित रूप से आवागमन करते हैं।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब हर दिन इस रास्ते से जिम्मेदार गुजरते हैं, तब भी ऐसी बदहाल स्थिति कैसे बनी रही? क्या यह अनदेखी है या फिर व्यवस्था की आंखों में धूल झोंकने वाली लापरवाही?

ठेकेदार–अधिकारियों की कथित मिलीभगत के आरोप
स्थानीय नागरिकों ने निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ठेकेदार और संबंधित तकनीकी अमले की मिलीभगत से मानकों को दरकिनार कर काम पूरा किया गया।
ग्रामीणों और वार्डवासियों का दावा है कि यदि निर्माण की तकनीकी जांच कराई जाए, तो कई खामियां और नियमों के उल्लंघन उजागर हो सकते हैं।
जनता का फूटा गुस्सा — “अब और नहीं सहेंगे लापरवाही”
घटिया निर्माण को लेकर क्षेत्र में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यह केवल सड़क का मामला नहीं, बल्कि जनता के टैक्स के पैसे और विकास के नाम पर हो रहे कथित दुरुपयोग का मुद्दा है।
वार्डवासियों ने स्पष्ट कहा है कि यदि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं की गई और जिम्मेदार ठेकेदारों व अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
“अब जवाब चाहिए, सिर्फ आश्वासन नहीं”
नौरोजाबाद की ये सड़कें अब सिर्फ गड्ढों की कहानी नहीं हैं, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही पर एक बड़ा सवाल बन चुकी हैं। जनता अब केवल निर्माण नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने वाली ठोस कार्रवाई की मांग कर रही है।
वार्ड 1 और 3 की सड़कों की यह स्थिति स्पष्ट संकेत देती है कि अगर समय रहते जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बनकर रह जाएगा।





