रघुराजगढ़ में अवैध क्लिनिक का आरोप, स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल – जानिए क्या हैं नियम
मऊगंज।
रघुराजगढ़ क्षेत्र में रमेश सिंह चौहान द्वारा बिना वैध लाइसेंस के अवैध क्लिनिक संचालित किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह क्लिनिक बिना किसी पंजीकरण और स्वास्थ्य विभाग की अनुमति के चलाया जा रहा है, जबकि प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस जांच या कार्रवाई नहीं की गई है। इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में नाराजगी बढ़ती जा रही है और लोग स्वास्थ्य विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
सूत्रों और शिकायतों के अनुसार, क्लिनिक में बिना योग्य चिकित्सकीय मानकों के मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। आरोप है कि यहां इंजेक्शन लगाना, ड्रिप चढ़ाना जैसे मेडिकल प्रोसीजर भी बिना उचित निगरानी के किए जाते हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई मामलों में तबीयत बिगड़ने पर मरीजों को मजबूरी में रीवा रेफर करने की बात भी सामने आई है।
क्या कहते हैं सरकारी नियम? (मध्य प्रदेश स्वास्थ्य/चिकित्सा विभाग के अनुसार)
भारत में और मध्य प्रदेश में क्लिनिक या अस्पताल चलाने के लिए स्पष्ट नियम लागू हैं। मुख्य रूप से Clinical Establishments (Registration and Regulation) Act, 2010 और मध्य प्रदेश का पुराना कानून नर्सिंग होम एवं क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन एक्ट लागू होता है।
इन नियमों के अनुसार:
कोई भी क्लिनिक, अस्पताल, लैब या नर्सिंग होम बिना पंजीकरण (Registration) के नहीं चलाया जा सकता।
हर चिकित्सा संस्थान को संचालन शुरू करने से पहले स्वास्थ्य विभाग/जिला प्राधिकरण से लाइसेंस लेना अनिवार्य है।
रजिस्ट्रेशन के लिए योग्य डॉक्टर, स्टाफ, उपकरण, साफ-सफाई और न्यूनतम चिकित्सा मानकों का पालन जरूरी है।
नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर क्लिनिक को बंद करने, जुर्माना लगाने और कानूनी कार्रवाई तक का प्रावधान है।
बिना लाइसेंस क्लिनिक चलाना कानूनन अपराध माना जाता है और संबंधित व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
स्थानीय मांग की बात:
इस पूरे मामले को लेकर संवाददाता दीनानाथ गुप्ता ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि तुरंत जांच कर अवैध क्लिनिक को चिन्हित किया जाए और नियमों के उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई की जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे फर्जी और बिना लाइसेंस चल रहे क्लिनिकों पर रोक लगाना बेहद जरूरी है ताकि मरीजों की जान के साथ कोई खिलवाड़ न हो।
अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर मामले पर कब तक संज्ञान लेता है और क्या कार्रवाई करता है।





