ढीमरखेड़ा की बंजर नदियों में ‘रेत संग्राम’ — रात ढलते ही जाग उठता अवैध खनन का खेल
कटनी।
ढीमरखेड़ा क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। हालात ऐसे बन चुके हैं मानो नदियां खुद अपने अस्तित्व की गुहार लगा रही हों। क्षेत्र के कई घाटों पर बिना अनुमति और बिना स्वीकृति के रात होते ही ट्रैक्टरों की गर्जना सुनाई देने लगती है और अवैध रेत कारोबार पूरी रफ्तार पकड़ लेता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेत माफियाओं को प्रशासन का जरा भी भय नहीं रह गया है। रात ढलते ही माफियाओं की “सुबह” शुरू हो जाती है और पूरी रात अवैध खनन का खेल चलता रहता है।
जानकारी के अनुसार बेलकुंड के वन क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग 4 ट्रॉली रेत निकाली जा रही है। वहीं सगमा घाट से करीब 6 ट्रॉली, दतला से लगभग 12 ट्रॉली, वर्दी घाट से 4 ट्रॉली तथा शारदा घाट से करीब 3 ट्रॉली रेत हर रात निकाली जा रही है।
सूत्रों की मानें तो इन सभी घाटों से मिलाकर करीब 40 ट्रॉली रेत प्रतिदिन अवैध रूप से निकाली जा रही है। हैरानी की बात यह है कि लगातार चल रहे इस अवैध कारोबार के बावजूद प्रशासन और खनिज विभाग की कार्रवाई शून्य नजर आ रही है।
अवैध खनन से न केवल नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है, बल्कि जलस्तर, पर्यावरण और ग्रामीणों के जल जीवन पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई कर अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाने की मांग की है।





