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*“विकास या विनाश? नौरोजाबाद धूल के धुएं में दफ्न… जनता का दम घुटा, अफसर गायब!”*

admin
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*“विकास या विनाश? नौरोजाबाद धूल के धुएं में दफ्न… जनता का दम घुटा, अफसर गायब!”*

 

*सड़क खुदी… व्यवस्था ध्वस्त… और धूल में दबी जनता की जिंदगी*

 

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नौरोजाबाद । पत्रकार फैज महम्मद की रिपोर्ट

उमरिया जिले के नौरोजाबाद से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्य के नाम पर पूरे नगर को मानो धूल का मैदान बना दिया गया है। सड़कें खोद दी गईं, गिट्टियां बिखेर दी गईं, लेकिन काम पूरा करने की कोई जल्दबाज़ी प्रशासन में दिखाई नहीं दे रही। हालात इतने बदतर हैं कि हर गुजरती गाड़ी के साथ उड़ने वाला धूल का गुबार लोगों की सांसों में जहर घोल रहा है।

 

धूल का आतंक”: दुकानदार से लेकर राहगीर तक परेशान

नगर के मुख्य मार्गों पर बिना पानी के छिड़काव के निर्माण कार्य जारी है। नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है। दुकानों में धूल भर रही है, लोग सांस की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं और राहगीरों की आंखों तक में जलन हो रही है।

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सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को हो रही है। जगह-जगह खोदे गए गड्ढों और उखड़ी सड़कों से अस्पताल तक पहुंचना तक दर्दनाक सफर बन गया है। लोगों का आरोप है कि तेज रफ्तार वाहनों से उड़ती गिट्टियां सीधे सिर और शरीर पर लगती हैं, जिससे हादसे का डर लगातार बना रहता है।

“CMO साहब सवालों से भागे”

जब जनता की इस गंभीर समस्या को लेकर मीडिया ने नगर पालिका के CMO से जवाब मांगना चाहा, तो जिम्मेदार अधिकारी कैमरे और सवालों से बचते नजर आए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी कार्यालय में कम और घर से ज्यादा नगर पालिका चलाते हैं। जनता का कहना है कि अगर अधिकारी खुद मैदान में उतरकर हालात देखें, तो शायद उन्हें समझ आए कि नगर की हालत कितनी भयावह हो चुकी है।

 

“जनता का सवाल — आखिर कब तक?”

लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं, लेकिन न तो गुणवत्ता दिख रही है और न ही सुरक्षा के इंतज़ाम। सवाल अब सिर्फ धूल का नहीं, बल्कि जनता की सेहत, सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का बन चुका है।

 

“जिला प्रशासन कब जागेगा?”

नौरोजाबाद में विकास कार्य अब लोगों के लिए राहत नहीं, बल्कि मुसीबत बनते जा रहे हैं। जनता पूछ रही है कि आखिर ठेकेदारों और अधिकारियों की इस लापरवाही का खामियाजा आम लोग कब तक भुगतेंगे? क्या जिला प्रशासन इस जानलेवा धूल और अधूरे निर्माण कार्य पर कोई ठोस कार्रवाई करेगा… या फिर नौरोजाबाद की जनता यूं ही धूल में घुटती रहेगी?

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