राजेंद्रग्राम में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी युवा मोर्चा का विशाल धरना-प्रदर्शन, आदिवासी अधिकारों और जनसमस्याओं को लेकर सरकार से तीखी मांगें
अनूपपुर (मध्यप्रदेश)।
जिले के पुष्पराजगढ़ तहसील अंतर्गत राजेंद्रग्राम स्थित स्व सहायता भवन (दुर्गा स्टेज) में बुधवार को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गों.ग.पा.) युवा मोर्चा, जिला अनूपपुर द्वारा एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन एवं ज्ञापन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक चला, जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत “जय सेवा – जय जोहार” के उद्घोष के साथ हुई, जिससे पूरा क्षेत्र आदिवासी एकता, अधिकार चेतना और संगठनात्मक उत्साह से गूंज उठा।
इस अवसर पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से लेकर जिला स्तर तक के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। मुख्य अतिथि के रूप में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कुंवर बलवीर सिंह तोमर उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में राष्ट्रीय संगठन मंत्री हरेंद्र सिंह मार्को, युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल सिंह दुर्वे, प्रदेश संगठन मंत्री तेज प्रताप सिंह उइके, प्रदेश संगठन सचिव हरि मरावी, प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्गा सिंह कोर्राम सहित अनेक वरिष्ठ नेता शामिल हुए। जिला स्तर पर भी संगठन की मजबूत उपस्थिति देखने को मिली, जिसमें जिला अध्यक्ष चंद्रिका मरकाम, जिला महासचिव महेश कुशराम, पूर्व जिला अध्यक्ष प्रीतम सिंह मरावी, युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष वीरेन्द्र टीकम, ब्लॉक अध्यक्ष प्रयाग टीकम, ब्लॉक अध्यक्ष आवाज सिंह धुर्वे तथा GSU मीडिया प्रभारी भूपेन्द्र सिंह पट्टा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

धरना-प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आदिवासी समाज की मूलभूत समस्याओं, अधिकारों और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को विस्तार से उठाया। कार्यक्रम में सबसे प्रमुख मांग अपर नर्मदा परियोजना बांध (शोभापुर) को निरस्त करने की रही। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस परियोजना से क्षेत्र के जल स्रोत, जंगल और जमीन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और स्थानीय समुदायों का विस्थापन बढ़ेगा। इसके साथ ही EVM के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने की मांग भी उठाई गई, जिसे लोकतांत्रिक पारदर्शिता से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।
संगठन ने जिले में चल रहे अवैध क्रेशर एवं खनन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। साथ ही 13 दिसंबर 2005 से वन भूमि पर काबिज किसानों को वनाधिकार पत्र उपलब्ध कराने की मांग को भी प्रमुखता से रखा गया। वक्ताओं ने PESA कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ग्राम सभाओं को वास्तविक अधिकार दिए बिना आदिवासी क्षेत्रों का समुचित विकास संभव नहीं है।
धरना स्थल पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर भी तीखी नाराजगी व्यक्त की गई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जिले में कई शासकीय कार्यालयों में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार आम समस्या बन चुकी है, जिस पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी पर भी गंभीर चिंता जताई गई।
इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने अवैध शराब बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध, भूमिहीन आदिवासियों को भूमि पट्टा एवं दो एकड़ कृषि भूमि का आवंटन, तथा विकास परियोजनाओं के नाम पर आदिवासियों के कथित शोषण और विस्थापन को रोकने की मांग भी रखी। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन लगातार संघर्ष करता रहेगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में सभी मांगों का विस्तृत ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया। पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, हालांकि बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी के कारण राजेंद्रग्राम क्षेत्र में दिनभर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी बनी रही।





