मझौली: झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से महिला की मौत, पैथोलॉजी की आड़ में चल रहा अवैध क्लीनिक
सीधी।
जिले के मझौली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जोगीपहाड़ी में झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही के कारण एक महिला की मौत का गंभीर मामला सामने आया है। मृतिका नवानगर (खड़ौरा) निवासी थी और पेट दर्द की शिकायत लेकर पति सुखदीन साकेत के साथ कथित डॉक्टर अजय केवट के पास गई। आरोप है कि डॉक्टर ने महिला की उचित जांच किए बिना ही दो बॉटल दवा और तीन इंजेक्शन लगा दिए और घर भेज दिया।
रात में महिला की हालत बिगड़ने पर अगली सुबह उसे सौम्या मेडिकल ले जाया गया, लेकिन वहां बिना इलाज वापस कर दिया गया। बाद में जोगीपहाड़ी स्थित ए के डायग्नोस्टिक सेंटर में ले जाने पर महिला को सरकारी अस्पताल भेजा गया, लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई।
परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मर्ग कायम किया और शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि मझौली अंचल में झोलाछाप डॉक्टरों के अवैध क्लीनिक बढ़ गए हैं, जिससे लोगों की जान जोखिम में है।
यह जानना जरूरी है:
मध्य प्रदेश में अवैध क्लिनिक और झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ नियम सख्त हैं। किसी भी व्यक्ति को मरीज का इलाज करने या क्लिनिक संचालित करने से पहले राज्य मेडिकल काउंसिल या राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) में पंजीकृत होना और स्वास्थ्य विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य है। बिना पंजीकरण और लाइसेंस का इलाज पूरी तरह अवैध माना जाता है और मरीज की जान जोखिम में डालता है। उल्लंघन होने पर क्लिनिक को सील किया जा सकता है, जुर्माना लगाया जाता है, और डॉक्टर/संचालक के खिलाफ पुलिस FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाती है, जिसमें IPC की धारा 304, 420 और भ्रष्टाचार निवारण कानून लागू हो सकते हैं। राज्य स्वास्थ्य विभाग और जिला स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) क्लिनिक निरीक्षण और लाइसेंसिंग के लिए जिम्मेदार हैं, जबकि मेडिकल काउंसिल डॉक्टर की पंजीकरण और प्रोफेशनल कंडक्ट की निगरानी करती है। मरीज और परिजन सीधे स्वास्थ्य विभाग या पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।


