स्कूल में लटकता ताला, बच्चों का भविष्य अंधेरे में: शिक्षक गायब, ग्रामीणों ने खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल
उमरिया। विपिन शिवहरे की कलम से…!
जिले के जनपद पंचायत बिरसिंहपुर पाली अंतर्गत ग्राम पंचायत कठई के गढरोंल गांव स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में शिक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार स्कूल में दो शिक्षकों की पदस्थापना होने के बावजूद अधिकांश समय स्कूल बंद रहता है और बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि कई बार स्कूल पहुंचने पर वहां ताला लटका हुआ मिलता है। जिस समय ग्रामीणों ने स्कूल का निरीक्षण किया, उस समय भी दोनों शिक्षक अनुपस्थित थे और विद्यालय पूरी तरह बंद मिला। गांव के लोगों का कहना है कि शिक्षक कभी-कभार ही स्कूल आते हैं और यदि आते भी हैं तो केवल एक-दो घंटे रुककर चले जाते हैं। इसके बाद विद्यालय में ताला लगाकर लौट जाते हैं।
बच्चों की शिक्षा और मध्यान्ह भोजन दोनों प्रभावित:
विद्यालय के नियमित रूप से बंद रहने के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब स्कूल ही नहीं खुलता तो बच्चों को शिक्षा कैसे मिलेगी। साथ ही सरकार द्वारा चलाए जा रहे मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) योजना का लाभ भी बच्चों को नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल बंद रहने के कारण कई बच्चे घर पर ही रह जाते हैं और धीरे-धीरे उनकी पढ़ाई से रुचि खत्म होती जा रही है। इससे बच्चों के भविष्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

अधिकारियों के निरीक्षण पर भी उठे सवाल:
ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर अधिकारियों द्वारा विद्यालयों का निरीक्षण किया जाता, तो इस तरह की लापरवाही सामने नहीं आती।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों का गांव में भ्रमण नहीं होने के कारण शिक्षक अपनी जिम्मेदारी से बचते रहते हैं और स्कूल की स्थिति बदहाल बनी हुई है।
ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग:
गांव के लोगों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए और लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही विद्यालय में नियमित रूप से शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए ताकि बच्चों को शिक्षा और मध्यान्ह भोजन जैसी सुविधाएं नियमित रूप से मिल सकें।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने के लिए मजबूर होंगे।





