उमरिया | विपिन शिवहरे
चांदपुर माध्यमिक विद्यालय में शौचालय निर्माण पर गंभीर सवाल, ग्रामीणों ने लगाया गुणवत्ता विहीन निर्माण का आरोप
मध्यप्रदेश के उमरिया जिले के जनपद पंचायत बिरसिंहपुर पाली अंतर्गत ग्राम चांदपुर स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय में चल रहे शौचालय निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में असंतोष और आक्रोश का माहौल देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय परिसर में बन रहे शौचालय का निर्माण कार्य निर्धारित मानकों और गुणवत्ता के अनुरूप नहीं किया जा रहा है, जिससे भविष्य में इसकी मजबूती और उपयोगिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही सामग्री मानक स्तर की नहीं है। आरोप है कि निर्माण में इस्तेमाल की जा रही रेत में अत्यधिक मात्रा में मिट्टी मिली हुई है, जिससे सीमेंट और अन्य निर्माण सामग्री का संतुलन प्रभावित हो रहा है। वहीं सीमेंट की मात्रा भी अपेक्षाकृत कम बताई जा रही है, जिससे पूरे ढांचे की मजबूती कमजोर पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
इसके अलावा निर्माण कार्य में लगाए जा रहे लोहे के सरियों (रॉड) को भी निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुसार नहीं बांधा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरिया की लंबाई और चौड़ाई में अत्यधिक दूरी रखकर बांधने का कार्य किया जा रहा है, जो किसी भी स्थायी निर्माण के लिए उचित नहीं माना जाता। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यह निर्माण कार्य लंबे समय तक टिकाऊ नहीं रह पाएगा।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य इसी प्रकार जारी रहा तो आगामी वर्षा ऋतु में यह शौचालय जर्जर अवस्था में पहुंच सकता है या क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहेगा। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि क्षेत्र के कुछ अन्य विद्यालयों में भी पूर्व में इसी प्रकार के शौचालयों का निर्माण कराया गया था, जो कुछ ही महीनों के भीतर खराब होकर अनुपयोगी हो गए थे।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे मामले की जानकारी संबंधित विभागीय अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों को भी है, इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। इससे लोगों के मन में यह संदेह भी उत्पन्न हो रहा है कि कहीं न कहीं इस प्रकार के निर्माण कार्य में लापरवाही या अनियमितता को अनदेखा किया जा रहा है।
ग्रामवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय में हो रहे इस निर्माण कार्य की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि यदि किसी प्रकार की अनियमितता या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए बनने वाली मूलभूत सुविधाएं मजबूत, सुरक्षित और मानक गुणवत्ता की होनी चाहिए, जिससे भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी या दुर्घटना की संभावना न रहे।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले को किस गंभीरता से लेते हैं और क्या वास्तव में निर्माण कार्य की जांच कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं, अथवा यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह प्रशासनिक उदासीनता के कारण अनदेखा कर दिया जाएगा।


