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मऊगंज का ‘बीमार’ अस्पताल: करोड़ों की मशीनें ‘शो-पीस’, डॉक्टर ‘लापता’ और जनता ‘राम भरोसे’**

admin
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ब्यूरो चीफ शुभम तिवारी संपर्क सूत्र -8770852833

**मऊगंज का ‘बीमार’ अस्पताल: करोड़ों की मशीनें ‘शो-पीस’, डॉक्टर ‘लापता’ और जनता ‘राम भरोसे’**

 

**मिर्ची रिपोर्ट: स्वास्थ्य मंत्री के गढ़ में स्वास्थ्य सेवाएँ वेंटिलेटर पर; विधायक की चुप्पी और प्रशासन की सुस्ती ने मऊगंज को बनाया ‘नरक’**

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**मऊगंज (विशेष प्रतिनिधि)।** सरकार के ‘सुशासन’ के दावों की मऊगंज जिला अस्पताल ने वो ‘पोस्टमॉर्टम’ रिपोर्ट पेश की है, जिसे देखकर शर्म से सिर झुक जाए। स्वास्थ्य मंत्री के प्रभाव वाले क्षेत्र से महज 60 किमी दूर स्थित यह अस्पताल आज किसी ‘भूतिया बंगले’ से कम नहीं है। रियलिटी चेक में अस्पताल के वार्डों में डॉक्टरों की जगह केवल सन्नाटा और खाली कुर्सियां ‘पिकनिक’ मनाती नजर आईं। यहाँ करोड़ों का बजट मशीनों के नाम पर ठिकाने लगा दिया गया, लेकिन उन मशीनों को चलाने वाले हाथ (डॉक्टर) नदारद हैं। अस्पताल के भीतर का नजारा रूह कंपा देने वाला है। **दन्त रोग कक्ष (कक्ष सं. 06)** में ताला लटका है, **नेत्र रोग कक्ष (कक्ष सं. 04)** में केवल खाली घूमने वाली कुर्सी मरीजों का इंतजार कर रही है और **हड्डी रोग कक्ष (कक्ष सं. 05)** में डॉक्टरों का कोई अता-पता नहीं है। एक्सीडेंट और गंभीर बीमारी से जूझते गरीब मरीज गलियारों में दम तोड़ रहे हैं, लेकिन साहबान शायद अपने निजी क्लीनिकों में चांदी काटने में मशगूल हैं। हाल ही में मऊगंज कलेक्टर ने बड़े तामझाम के साथ नई मशीनों का उद्घाटन किया। जनता को लगा कि अब अच्छे दिन आएंगे, लेकिन साहेब! मशीनें खुद ऑपरेशन नहीं करतीं। क्या करोड़ों का बजट सिर्फ ठेकेदारों के घर भरने और फोटो खिंचवाने के लिए था? बिना डॉक्टर के अस्पताल चलाना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल के हवाई जहाज उड़ाना। जिला प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा यह ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ का खेल अब बर्दाश्त से बाहर है। मऊगंज के माननीय विधायक जी, जनता ने आपको विकास के लिए चुना था, विनाश का तमाशा देखने के लिए नहीं। आपकी नाक के नीचे सरकारी तंत्र भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। स्वास्थ्य मंत्री जी, आपके जिले से सटे इस इलाके में गरीब इलाज के बिना तड़प रहा है, क्या आपका ‘मिशन मोड’ सिर्फ कागजों पर ही दौड़ता है? जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और जनप्रतिनिधि मौन साध लें, तो जनता किसके पास जाए?

* **सवाल 1:** ड्यूटी के वक्त गायब रहने वाले इन ‘वीआईपी’ डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज क्यों नहीं होती?

* **सवाल 2:** क्या प्रशासन इन डॉक्टरों से ‘हफ्ता’ वसूलता है, जो इनकी मनमानी पर आंखें मूंदे बैठा है?

* **सवाल 3:** स्वास्थ्य मंत्री और क्षेत्रीय विधायक जनता को बताएं कि बिना डॉक्टर के ये करोड़ों की मशीनें किस काम की?

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मऊगंज सिविल अस्पताल की यह हालत सिस्टम के मर जाने का सबूत है। अगर 24 घंटे के भीतर व्यवस्थाएं नहीं सुधरीं और डॉक्टरों की तैनाती सुनिश्चित नहीं हुई, तो इस भ्रष्टाचार की परतें उखाड़ना जारी रखेगा। प्रशासन कान खोलकर सुन ले—जनता का सब्र अब टूट चुका है।

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